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कर्नाटक पुलिस अधिनियम के तहत लाइव बैंड रेस्तरां की निगरानी के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
28 Jan 2018 3:01 PM GMT
कर्नाटक पुलिस अधिनियम के तहत लाइव बैंड रेस्तरां की निगरानी के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने “‘The Licensing and Controlling of Places of Public Entertainment (Bangalore City) Order 2005’ की संवैधानिकता को कर्नाटक पुलिस अधिनियम के तहत वैध ठहराया है। इस अधिनियम के तहत मनोरंजन के सार्वजनिक स्थलों जैसे लाइव बैंड रेस्तरां, डिस्कोथिक, कैबरे हॉल आदि का विनियमित किया जाता है। कोर्ट ने कर्नाटक लाइव बैंड रेस्तरां एसोसिएशन द्वारा इस बारे में जारी याचिका को खारिज कर दिया।

इससे पहले 1989 में सुप्रीम कोर्ट ने Licensing and Controlling of Places of Public Amusements (Bangalore City) Order, 1989 मामले में फैसला दिया था कि यह क़ानून लाइव बैंड रेस्तरां, डिस्कोथिक आदि पर लागू नहीं होता। उस समय यह दलील दी गई थी कि लाइव बैंड रेस्तरां सार्वजनिक मनोरंजन के तहत नहीं आता। इस पृष्ठभूमि में, 2005 के आदेश में सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों को भी शामिल किया गया।

इस आदेश को लाइव बैंड रेस्तरां ने चुनौती दी और इसे मनमाना, अनुचित, कठोर और मौलिक अधिकारों का हनन करने वाला बताया।

न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति एएम सप्रे ने उनकी दलील अनसुनी कर दी और कहा:-

“... हर राज्य के पुलिस प्रशासन का यह वैधानिक कर्तव्य है कि वह आम लोगों की सुरक्षा और नैतिकता को वरीयता दे। ये दोनों ही बातें महत्त्वपूर्ण हैं और यह इस सिद्धांत के केंद्र में है कि एक व्यक्ति को जो लाभ होता है वह समुदाय तक पहुंचना चाहिए...”

कोर्ट ने कहा कि आदेश आम लोगों की सुरक्षा, समाज कल्याण और नैतिकता के हित में है। कोर्ट ने मुंबई में हाल में आग लगने की घटना पर गौर किया जिसमें कई जानें चली गई थीं क्योंकि उस रेस्तरां में सुरक्षा के नियमों की अवहेलना की गई थी। कोर्ट ने सार्वजनिक मनोरंजन स्थल की निगरानी की बात पर जोर डालने के लिए दिल्ली के उपहार सिनेमा में आग लगने की घटना का भी उदाहरण दिया जो सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का परिणाम थी।


 
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