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दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रादेशिक सेना में महिलाओं की भर्ती का रास्ता खोला [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
5 Jan 2018 3:50 PM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रादेशिक सेना में महिलाओं की भर्ती का रास्ता खोला [निर्णय पढ़ें]
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एक बडे फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट मे प्रादेशिक सेना यानी टेरीटोरियल आर्मी में महिलाओं के लिए दरवाजे खोल दिए।

 कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस  सी हरिशंकर की बेंच ने शुक्रवार को कहा  कि प्रादेशिक सेना में,  जोकि किसी भी आपात स्थिति में सेना के बाद रक्षा की दूसरी पंक्ति है, में महिलाओं की भर्ती पर प्रतिबंध पूरी तरह अधिकार से बाहर है।

कोर्ट ने कहा कि  टीए अधिनियम की धारा 6 में "किसी भी व्यक्ति" में पुरुष और महिला दोनों शामिल होंगे।

हाईकोर्ट का ये फैसला  कुश कालरा द्वारा दायर एक याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने इसे "संस्थागत भेदभाव" कहा था। उन्होंने उस विज्ञापन  का हवाला दिया था जिसमें सिर्फ पुरुष उम्मीदवारों को  प्रादेशिक सेना में भर्ती के लिए बुलाया था।

इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान  केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि महिलाएं प्रादेशिक सेना, इसकी  रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट में शामिल हो सकती हैं और सेवा कर सकती हैं। साथ ही उन पर मानद आयोगों के लिए भी विचार किया जाएगा।

भर्ती विज्ञापन के संबंध में हलफनामे में  दावा किया था कि पैदल सेना इकाइयों में पुरुषों की नियुक्ति प्रादेशिक सेना अधिनियम के अनुसार लिया गया एक नीतिगत निर्णय है और नीति में तभी संशोधन किया जा सकता है अगर कानून में संशोधन किया जाए।


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