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हज कोटे के राज्यवार ड्रा पर अंतिम फैसला 2018 की हज नीति को चुनौती देने वाली याचिका के निपटारे के बाद ही : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
5 Jan 2018 1:41 PM GMT
हज कोटे के राज्यवार ड्रा पर अंतिम फैसला 2018 की हज नीति को चुनौती देने वाली याचिका के निपटारे के बाद ही : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि 2018 अगस्त के लिए हज यात्रियों के राज्यवार ड्रा के द्वारा हज कोटे का आवंटन सुप्रीम कोर्ट के निर्णायक आदेश के बाद ही लागू होगा। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खान्विलकर की पीठ ने सुनाया।

पीठ इस मामले में केरल स्टेट हज कमिटी सहित अन्य लोगों द्वारा जारी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिसमें 2018 के दिशानिर्देशों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का उल्लंघन करता है। [http://www.livelaw.in/sc-issues-notice-petition-challenging-haj-guidelines-2018-read-petition/]

एटोर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, “हज कमिटी अधिनियम 2002 की धारा 27 के प्रावधानों के अनुसार यह राज्य हज कमिटी का दायित्व है कि वह भारतीय हज कमिटी की नीतियों और निर्देशों को लागू करे। इसलिए हो सकता है कि केरल हज कमिटी 2018 की नीति को चुनौती न दे जिसे भारत की हज कमिटी की सलाह से बनाया गया था।”

इसके उत्तर में एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा, “हम केंद्र सरकार की हज नीति को चुनौती दे रहे हैं जिसको बनाने में भारत की सभी हज कमेटियों की कोई भूमिका नहीं थी।” भूषण ने कहा, “सऊदी अरब की सरकार ने भारत के लिए 1.75 लाख हज यात्रियों का कोटा जारी किया है। 2018 की नीति के अनुसार विभिन्न राज्यों में मुसलामानों की जनसंख्या के हिसाब से यह कोटा बांटा जाना है। उत्तर प्रदेश और बिहार में मुसलमानों की जनसंख्या सबसे अधिक है। बिहार के लिए लगभग 12 हजार सीट आवंटित किए गए हैं जबकि वहाँ से हज के लिए सिर्फ छह हजार आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। इसका मतलब यह हुआ कि लगभग छह हजार सीट खाली रह जाएंगें। इसकी तुलना में केरल से हज यात्रा के लिए 95 हजार से अधिक आवेदन आए हैं जबकि इसके लिए आवंटन 15 में से सिर्फ एक व्यक्ति को मिला है।”

भूषण ने कहा, “...सीटों का आवंटन आवेदकों की संख्या के आधार पर होना चाहिए न कि उस राज्य की मुस्लिम जनसंख्या के आधार पर। इस बारे में एक अखिल भारतीय ड्रा भी हो सकता है। वर्तमान नीति भेदभाव वाला है।”

भूषण ने कहा कि कुल आवंटित 1.75 लाख सीट में से 30 प्रतिशत निजी टूर ऑपरेटर्स को उपलब्ध होता है जो कि हज यात्रा के लिए हज कमिटी द्वारा निर्धारित राशि से दोगुनी राशि लोगों से लेते हैं। उन्होंने कहा, “कृपया निजी टूर ऑपरेटर्स के लिए आरक्षित सीटों को हज कमिटी को नीलाम करने दें।“ पीठ ने एटोर्नी जनरल से पूछा, “निजी टूर ऑपरेटर्स को इतनी भारी संख्या में सीट दने का क्या मतलब है?” इसके बाद बेंच ने केंद्र को दो सप्ताह के भीतर इसके खिलाफ हलफनामा दायर करने को कहा।

अंत में भूषण ने पीठ से आग्रह किया कि 2018 की हज यात्रा के लिए सीटों का आवंटन तब तक नहीं किया जाए जब तक कि कोर्ट 2018 के दिशानिर्देशों को दी गई चुनौती के बारे में अंतिम फैसला नहीं ले लेता।

कोर्ट ने कहा कि राज्यवार सीटों के ड्रा को वर्तमान याचिकाओं पर फैसला आ जाने के बाद ही अंतिम रूप से विचार किया जाएगा।

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