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एक राष्ट्र, एक समान शिक्षा पर दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

LiveLaw News Network
9 Dec 2017 4:59 AM GMT
एक राष्ट्र, एक समान शिक्षा पर दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
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सुप्रीम कोर्ट ने  छह से 14 वर्ष के सभी बच्चों के लिए देशभर में समान शिक्षा व्यवस्था की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई थी।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम का आदेश कैसे दिया जा सकता है ?

कोर्ट इस विषय पर क्या कह सकता है। ये संभव नहीं है। सब कुछ कोर्ट नही कर सकता।

ये याचिका गाजियाबाद में प्राथमिक शिक्षक नीता उपाध्याय ने ये याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि वर्तमान शिक्षा पद्धति सबको समान अवसर नहीं देती।  ये संविधान की धारा 16 के विपरीत है । याचिका में कहा गया था कि संविधान की धारा 21ए, 14,15,16, 39(एफ) और 51ए की पूर्ति के लिए समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की जरूरत है । अगर समान पाठ्यक्रम पूरे देश में लागू किया जाता है तो सबको समान अवसर मिलेंगे ।याचिका में ये भी कहा गया था कि कई सारे बोर्ड होने की वजह से बच्चे समान शिक्षा से वंचित रह जाते हैं । इससे निपटने के लिए निर्धन और धनी लोगों के बच्चों को एक छत पर शिक्षा देने की व्यवस्था करनी होगी याचिका में कई सारे बोर्डों की जगह एक राष्ट्र और एक एजुकेशन बोर्ड की मांग की गई थी।

इस याचिका में केंद्र को छह से 14 साल के बच्चों के लिए पर्यावरण, स्वास्थ्य और सुरक्षा तथा समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद विषय पर प्रामाणिक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करवाने तथा ऐसी मानक किताबें देने का निर्देश देने को कहा गया था जिनमें मूलभूत अधिकारों, मूलभूत कर्तव्यों, निर्देशात्मक सिद्धांतों और प्रस्तावना में निर्धारित किए गए स्वर्णिम लक्ष्यों पर आधारित पाठ हों। संविधान की धारा 21ए के तहत वर्तमान शिक्षा प्रणाली विसंगतिपूर्ण है। याचिका में कहा गया था कि बच्चों के अधिकारों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा तक सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि बच्चों के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आधार पर भेदभाव किए बगैर गुणवत्ता योग्य शिक्षा उपलब्ध करवाने तक इसका विस्तार किया जाना चाहिए।

 इसमें आगे कहा गया था कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। याचिका में इस बात का भी जिक्र है कि समान शिक्षा प्रणाली धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म करेगी और संविधान में निर्धारित अवसरों और दर्जे की समानता को लागू करेगी।

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