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जजों की नियुक्ति के बारे में कॉलेजियम के फैसले की प्रमुख बातें

LiveLaw News Network
7 Dec 2017 8:23 AM GMT
जजों की नियुक्ति के बारे में कॉलेजियम के फैसले की प्रमुख बातें
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सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यीय कॉलेजियम ने 19 वकीलों को जजों के रूप में नियुक्ति की सिफारिश की है। ये नियुक्तियां मद्रास (9), कर्नाटक (5) और कलकत्ता (5) हाई कोर्ट में होंगी। इस फैसले की कुछ दिलचस्प बातें इस तरह से हैं :

कर्नाटक के राज्यपाल को लगा कि जिन लोगों के नामों की सिफारिश की गई है उनमें से कुछ अक्षम हैं पर उनका नाम नहीं बताया गया।

कॉलेजियम ने कहा कि कर्नाटक के राज्यपाल ने बताया है कि सुझाए गए कुछ नाम सक्षमता के पैमाने पर खड़े नहीं उतरते लेकिन कहा कि राज्यपाल ने इन लोगों के नाम नहीं बताए हैं और न ही वे आधार जिन पर उन्हें अक्षम बताया है। कॉलेजियम  ने कहा, “हम राज्यपाल के इस विचार से सहमत हैं कि जिन लोगों के नामों की अनुशंसा की गई है उनके प्रदर्शनों और उनकी ईमानदारी का पूरी तरह वस्तुनिष्ठ आकलन के बाद ही उनकी नियुक्ति हो। इस बारे में यह कहने की जरूरत नहीं है कि जिन लोगों के नामों की सिफारिश की गई है उनका आकलन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर किया गया है; और जहाँ तक उनकी ईमानदारी, चरित्र और व्यवहार आदि की बात है, खुफिया ब्यूरो ने इसकी जांच करने के बाद कहा है कि निजी रूप से और एक पेशेवर के रूप में उनकी छवि अच्छी है और अनकी सत्यनिष्ठा के खिलाफ कुछ भी सामने नहीं आया है।”

सुझाए गए नामों से मुख्यमंत्री की असहमति को नजरअंदाज किया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने वकीलों की एक संस्था द्वारा हाई कोर्ट में प्रोन्नति के लिए सुझाए गए नामों को लेकर कुछ आशंकाएं जाहिर की थी और कहा था कि सुझाए गए नाम समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। मुख्यमंत्री की इन आपत्तियों के बारे में कॉलेजियम ने कहा, “उन्होंने सुझाव दिया है कि सम्पूर्ण प्रस्ताव को हाई कोर्ट के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया जाए। हमारे सामने अन्य आपत्त्तियों को भी लाया गया है। इस बारे में इन तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने 8 दिसंबर 2016, 11 और 13 जनवरी 2017 को जो बैठक की थी उसमें उम्मीदवारों की योग्यता, अनुभव, प्रदर्शन और व्यवहार के बारे में चर्चा की थी और इसका ब्यौरा इन बैठकों की मिनट में दर्ज है। चूंकि हाई कोर्ट का कॉलेजियम इन बातों पर पहले ही गौर कर चुका है, इसलिए अब इन पर दुबारा गौर करने की जरूरत नहीं है।

न्यूनतम पेशेवर आय नहीं होने की वजह से छांट दिए गए

कॉलेजियम ने एडवोकेट पीयूष चतुर्वेदी को कलकत्ता हाई कोर्ट में नियुक्त करने के सुझाव को रद्द कर दिया क्योंकि उसे पता चला कि उनकी औसत पेशेवर आय न्यूनतम पेशेवर आय की निर्धारित सीमा से कम है।

45 साल की उम्र में हाई कोर्ट का जज

कॉलेजियम ने कहा कि एडवोकेट सब्यसाची चौधरी और एडवोकेट साक्य सेन की उम्र जब उनके नामों को नियुक्ति के लिए सुझाया गया उस समय निर्धारित न्यूनतम उम्र सीमा 45 से कम थी, इसके बावजूद उनकी नियुक्ति की अनुशंसा की गई है। कॉलेजियम ने कहा, “ सब्यसाची चौधरी ने 45 साल पूरा कर लिया है और इसलिए हम उनके नाम की अनुशंसा कर रहे हैं। जहाँ तक साक्य सेन की बात है, उनके लिए उम्र सीमा में ढील देने के बाद उनकी नियुक्ति की अनुशंसा कर रहे हैं।”

एक अनुशंसित व्यक्ति के संबंधी की ओर से अंडरटेकिंग जरूरी नहीं  

कॉलेजियम ने न्याय विभाग के इस तर्क पर गौर किया कि एडवोकेट रवि कृष्ण कपूर जिनकी नियुक्ति की अनुशंसा की गई है उनके वकील पिता जो कि कलकाता हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं, से किसी तरह का अंडरटेकिंग नहीं मिला है। कॉलेजियम ने कहा कि इस तरह की अंडरटेकिंग का आधार सिर्फ प्रशासनिक निर्देश है और यह जरूरी नहीं है। हमारे विचार में, उम्मीदवारों से इस तरह के अंडरटेकिंग पर जोर देने की जरूरत नहीं है।

कम फैसलों की ज्ञात/अज्ञात जानकारी के बावजूद नियुक्ति की अनुशंसा

कॉलेजियम ने इस बात पर भी गौर किया कि एडवोकेट अरिंदम मुख़र्जी जिनके नाम की नियुक्ति के लिए अनुशंसा की गई है, उनके ज्ञात/अज्ञात फैसलों की संख्या कम है। कॉलेजियम ने कहा, हमारे विचार से किसी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए ज्ञात/अज्ञात फैसले अन्य कारकों में से सिर्फ एक कारक है जो कि नियुक्ति के लिए उस व्यक्ति की योग्यता का निर्धारण करता है।

55 साल के होने के कारण सूची से बाहर हुए

कॉलेजियम ने एवी राधाकृष्णन के नाम को अस्वीकार कर दिया क्योंकि उन्होंने इस नियुक्ति के लिए निर्धारित 55 वर्ष की उम्र सीमा को पार कर लिया था। यद्यपि एडवोकेट सी इमालिअस की उम्र 55 से ज्यादा है, पर उनके नाम को अनुमोदित कर दिया गया क्योंकि उनके नाम की अनुशंसा करने के समय वह इस उम्र सीमा के अंदर थे।

कुछ अपुष्ट जानकारियों के पुष्ट होने तक प्रोन्नति के प्रस्ताव को स्थगित किया

एडवोकेट बी पुगालेंधी को हाई कोर्ट का जज बनाने की अनुशंसा को फिलहाल रोक दिया गया है क्योंकि कॉलेजियम को उनके बारे में कुछ अपुष्ट विपरीत जानकारियों की सत्यता का पता करना बाकी है।


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