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रामजन्म भूमि- बाबरी मस्जिद विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

LiveLaw News Network
4 Dec 2017 4:31 PM GMT
रामजन्म भूमि- बाबरी मस्जिद विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
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सात सालों से लंबित पड़े राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट अब सुनवाई को तैयार है। मंगलवार को चीफ जस्टिस की अगवाई वाली बेंच इस मामले कि सुनवाई करेगी। इस मामले में कुल 13 याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

बेंच में चीफ जस्टिस दीपत मिश्रा, जस्टिस अशोक  भूषण और जस्टिस एस  अब्दुल नजीर शामिल हैं।

गौरतलब है कि  11 अगस्त को सभी पक्षकारों को अपने-अपने हिस्से के विभिन्न भाषाओं के दस्तावेजों को अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए 12 हफ्ते का वक्त देते हुए साफ कहा था कि भविष्य में सुनवाई नहीं टाली जाएगी। ये दस्तावेज हिन्दी, उर्दू, फारसी, संस्कृत, पाली सहित सात भाषाओं में थे। साथ ही बेंच ने कहा था कि इस मामले को अनिश्चितकाल के लिए  नहीं टाला जा सकता और मामले की अंतिम सुनवाई होनी चाहिए।  अदालत ने सभी पक्षकारों को हिन्दी, पाली, उर्दू, अरबी, पारसी, संस्कृत आदि सात भाषाओं के अदालती दस्तावेजों को 12 हफ्ते में अंग्रेजी में अनुवाद करने का निर्देश दिया था जबकि उत्तर प्रदेश सरकार को विभिन्न भाषाओं के मौखिक साक्ष्यों को अंग्रेजी में अनुवाद करने का जिम्मा सौंपा गया था और कहा गया है कि अब अनुवाद का ये ये काम पूरा हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा था कि पहले ये तय किया जाएगा कि विवादित भूमि पर किसका अधिकार है ?

इससे पहले अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में एक और मोड आ गया था जब बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई हारने के करीब 71 साल बाद शिया वक्फ बोर्ड अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिया वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद पर अपनी दावेदारी जताते हुए यह भी कहा है कि मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी।

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में वे याचिकाएं भी शामिल हैं जिनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने साल 2010 में विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश को चुनौती दी गई है। इस मामले में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के कूदने के बाद सरगर्मी बढ़ गई थी। उन्होंने तीन बार चीफ जस्टिस जेएस खेहर के सामने जल्द  सुनवाई की गुहार लगाई थी। सात साल से लंबित मामले में अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने जा रहा है और अब शिया वक्फ बोर्ड भी इसमें कूद पड़ा है।

शिया वक्फ बोर्ड ने निचली अदालत द्वारा 30 मार्च,1946  को दिए उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें बाबरी मजिस्द पर शिया वक्फ बोर्ड की दावेदारी मानने से इनकार कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में बोर्ड ने कहा है कि चूंकि इससे संबंधित सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं इसलिए उन्होंने निचली अदालत केफैसले को सीधे। सुप्रीम कोर्ट  में चुनौती दी है। अपनी याचिका में बोर्ड ने कहा है कि बाबरी मस्जिद मुगल राजा बाबर ने नहीं बल्कि उनके मंत्री अब्दुल मीर बाकी ने बनवाया था। बोर्ड का यह भी कहना है कि मीर बाकी ने अपने पैसे से इसका निर्माण कराया था और मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। चूंकि मीर बाकी शिया मुसलमान था लिहाजा यह शिया वक्फ की संपत्ति है। याचिका में कहा गया कि निचली अदालत का यह आदेश गलत है जिसमें बाबरी मस्जिद को शिया वक्फ की संपत्ति मानने से इनकार कर दिया गया था।

वहीं सिटीजन्स फॉर जस्टिस की ओर से भी कई प्रख्यात हस्तियों ने इस मुद्दे पर अर्जी दाखिल की है और कहा है कि कोर्ट को इसे सिर्फ एक संपत्ति विवाद की तरह नहीं देखना चाहिए बल्कि जमीन का काम धर्मों पर ही छोड देना चाहिए।  श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, ओम थानवी,आरबी श्रीकुमार, आनंद पटवर्धन, गणेश देवे, मेधा पाटकर, अरूणा रॉय, अनिल धनखड, तीस्ता शीतलवाड, जॉय सेनगुप्ता, साइरस गुजदेर, राम रहमान, सुहैल हाशमी, एमके रैना, डॉ बीटी ललिता नायक, जॉन दयाल, सुमन मुखोप्धयाय, किरण नागरकर, कुमार केतकर व कल्पना कन्नाबिरान आदि ने कहा है कि बिना विवाद के सभी को जगह दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि कोर्ट के आदेश से हिंसा हो सकती है जिससे वो नींव हिल सकती हैं जिस पर भारतीय लोकतंत्र खडा है। वहीं तीन तलाक मामले में पक्षकार रही वकील फरहा फैज ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या मामले में पक्षकार बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि पहले वो सिविल सूट पर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करेगा और उसके बाद हस्तक्षेप याचिकाओं को देखेगा।

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