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‘पद्मावती ‘ को लेकर उच्च पदों पर बैठे लोगों की बयानबाजी से नाराज सुप्रीम कोर्ट, कहा सेंसर बोर्ड के काम में ना दें दखल

LiveLaw News Network
28 Nov 2017 8:58 AM GMT
‘पद्मावती ‘ को लेकर उच्च पदों पर बैठे लोगों की बयानबाजी से नाराज सुप्रीम कोर्ट, कहा सेंसर बोर्ड के काम में ना दें दखल
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बॉलीवुड की विवादित फिल्म पद्मावती को लेकर हो रही बयानबाजी पर सुप्रीम कोर्ट ने कडी नाराजगी जाहिर की है।

मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि अभी तक फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने सर्टिफिकेट नहीं दिया है लेकिन पब्लिक ऑफिस में बैठे लोग और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने फिल्म को देखा तक नहीं है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए क्योंकि ये एक तरह से CBFC के कामकाज में दखल देना होगा और ‘प्री जजशिप’ होगा। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो वो कानून के राज्य के सिद्धांत का उल्लंघन करेगा। जब CBFC के पास मामला लंबित हो तो जिम्मेदार लोगों को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए क्योंकि सेंसर बोर्ड विधान के तहत काम करता है और कोई उसे नहीं बता सकता कि कैसे काम करना है ? बेंच ने कहा कि उम्मीद है कि सब संबंधित लोग कानून का पालन करेंगे क्योंकि बोर्ड विधान के तहत गाइडलाइन के माध्यम से काम करता है।

वहीं निर्माता की ओर से हरीश साल्वे ने कहा कि वो देश से बाहर फिल्म को रिलीज नहीं कर रहे क्योंकि इससे फिल्म को नुकसान होगा। इसलिए CBFC के सर्टिफिकेट का इतंजार किया जा रहा है।

चीफ जस्टिस मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने वकील मनोहर लाल शर्मा की याचिका का निस्तारण कर दिया।  याचिका में फिल्म के ब्रिटेन में रिलीज करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके अलावा सीबीआई को निर्माता निर्देशक पर विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज करने के निर्देश देने की मांग भी थी।

कोर्ट ने याचिका की इन प्रार्थना पर सवाल खडे किए और कहा कि ये जनहित याचिका कानून का दुरुपयोग है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि ये मामला जुर्माना लगाने का है लेकिन वो जुर्माना नहीं लगा रहे।

इस दौरान बेंच ने कोर्ट में मौजूद ASG मनिंदर सिंह और नरसिम्हन से भी राय मांगी।

दरअसल इस नई याचिका में वकील शर्मा ने फिल्म के एक दिसंबर को देश के बाहर रिलीज होने पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका कहना था कि फिल्म के निर्माता ने कोर्ट को गुमराह किया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि पद्मावती फिल्म में ऐतिहासिक चरित्र रानी पद्मावती के चरित्र को खराब और बदनाम करने की कोशिश की गई है।

इससे पहले शर्मा ने एक और याचिका दाखिल की थी जिसमें पद्मावती फिल्म के देश में रिलीज होने पर रोक की मांग की गई थी। कोर्ट ने उस याचिका पर यह कहते विचार करने से इन्कार कर दिया था कि अभी मामला सेंसर बोर्ड में लंबित है।

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