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नुकसानदेह कीटनाशकों पर शीघ्र प्रतिबन्ध लगाने की याचिका पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस [याचिका पढ़े]

LiveLaw News Network
14 Nov 2017 1:35 PM GMT
नुकसानदेह कीटनाशकों पर शीघ्र प्रतिबन्ध लगाने की याचिका पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस [याचिका पढ़े]
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भारत में नुकसान पहुंचाने वाले कीटनाशकों के प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए दायर याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करने के बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि ये नुकसान पहुंचानेवाले रसायन और कीटनाशक खेतों में काम करने वालों, आसपास रहने वाले लोगों और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर खरनाक प्रभाव डाल रहे हैं।

यह याचिका बेंगलुरु की कविता कुरुगंति ने दायर किया है। कविता अलायन्स फॉर सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर की राष्ट्रीय संयोजक हैं और देश में खेती संबंधी संकट पर काम कर रही हैं। इसके अलावा पंजाब के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी और चेन्नई के वीआर अनंतसायनन भी हैं। अनंतसायनन सेफ फूड अलायन्स के संयोजक हैं जो तमिलनाडु में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और सतत कृषि आजीविका पर काम करते हैं।

यह याचिका वरिष्ठ एडवोकेट प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर की गई है और इसमें किसानों, कृषि कर्मियों और उपभोक्ताओं के जीवन के अधिकार को लागू करने की मांग की गई है। याचिका देश में इस समय प्रयोग होने वाले कम से कम ऐसे 93 खतरनाक कीटनाशकों को प्रतिबंधित करने की मांग करता है जिसको दुनिया के अन्य देशों में भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। याचिका में छह अन्य कीटनाशकों को भी प्रतिबंधित करने की मांग की गई है जो भारत में प्रयोग हो रहे हैं जबकि अन्य देशों ने इन पर या तो प्रतिबन्ध लगा दिया है या फिर इनके प्रयोग को सीमित कर दिया है।

 याचिका में उदाहरण देकर कहा गया है कि पंजाब, केरल और महाराष्ट्र में विशेषकर ये कीटनाशक पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालने के साथ साथ किसानों को आत्महत्या करने के लिए बाध्य कर रहा है।

याचिका में कहा गया है, “केंद्र और राज्य सरकारों का यह कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि नागरिक के रूप में किसानों और कृषि कार्य में लगे लोगों का स्वास्थय सुरक्षित रहे। लेकिन यह सुनिश्चित करने के बजाय, ऐसा लगता है कि वे देश के नागरिकों विशेषकर हमारे फसल उगाने वाले लोगों के स्वास्थय पर मंडरा रहे संकटों को नजरअंदाज कर रहे हैं।”

याचिका के अनुसार देश का कोई भी हिस्सा जहाँ खेती होती है वहाँ मानव स्वास्थ्य पर कीटनाशकों के बुरे प्रभाव से बचा नहीं है। कुछ क्षेत्र तो इससे बहुत ज्यादा प्रभावित हैं।

पंजाब का उदाहरण देते हुए याचिका में कहा गया है कि हरित क्रान्ति की अगुआई करने वाला राज्य रासायनिक खाद, कीटनाशक, सिंचाई और संकर बीजों के प्रयोग के कारण गेहूं और चावल का देश में सबसे बड़ा उत्पादक बन गया।

वैज्ञानिक रिपोर्टों को उद्धृत करते हुए याचिका में कहा गया है कि पिछले चार दशकों में कृषि उत्पादन में आई उच्च वृद्धि ने किसानों, कृषि कर्मियों और वहाँ के निवासियों को बहुत ही बुरी हालत में ला दिया है क्योंकि कीटनाशकों के प्रयोग के कारण उनका पर्यावरण और जल प्रदूषित हो गया है और उनका स्वास्थय बिगड़ रहा है।

केरल में एंडोसल्फान के मुद्दे का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि केरल एंडोसल्फान के प्रयोग के बुरे प्रभाव को झेल रहा है। एंडोसल्फान  ओरगानोक्लोरीन कीटनाशक है जिसका आसपास के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इसको प्रतिबंधित किया गया।

याचिकाकर्ताओं ने बिहार में मोनोक्रोटोफोस के प्रयोग का भी जिक्र किया है जिसके कारण  23 छात्रों की मौत हो गई थी क्योंकि इससे उनका मध्याह्न भोजन विषैला हो गया था। यह घटना जुलाई 2013 में हुई।

याचिका में कीटनाशकों के प्रयोग को किसानों में  आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति से जोड़कर दिखाया गया है। याचिका में कहा गया है कि “राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, पिछले दो दशकों में देश में लगभग 30 हजार किसानों ने आत्महत्या की है और इस तरह औसतन हर दिन 46 किसानों ने आत्महत्या की है। वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि इन आत्महत्याओं के पीछे किसानों में इसके कारण होने वाला डिप्रेशन और आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति है।”

याचिका में कहा गया है अनेकों वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि कीटनाशकों के अधिक संपर्क में आने पर लोगों में कई तरह के कैंसर होने और उनके डीएनए के क्षतिग्रस्त होने, दिमाग स्नायुतंत्र को नुकसान पहुँचने का ख़तरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पार्किंसन की बीमारी, जन्मजात विकलांगता होने के अलावा बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी यह प्रभावित करता है। भारत के कई राज्य जैसे आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तमिलनाडु, पंजाब और कर्नाटक में इसके खतरनाक प्रभाव देखे गए हैं।


 
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