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शुक्रवार की धमाकेदार सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कामिनी जायसवाल की याचिका की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया

LiveLaw News Network
11 Nov 2017 5:12 PM GMT
शुक्रवार की धमाकेदार सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कामिनी जायसवाल की याचिका की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया
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शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जो नाटक हुआ उसके बाद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र ने कामिनी जायसवाल की याचिका की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया। कामिनी जायसवाल ने अपनी याचिका में अपील की है कि कोर्ट उच्चतर न्यायालय में घूस के आरोपों की जांच करे जो कि एक मेडिकल कॉलेज को खोले जाने से संबंधित है।

इस नव गठित पीठ में जिन जजों को शामिल किया गया है वे हैं न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल, न्यायमूर्ति एके मिश्र और न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर।

वृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति जे चेल्मेश्वर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर ने कामिनी जायसवाल की याचिका को सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम जजों की संवैधानिक पीठ को सुनवाई के लिए सौंप दिया तजा।

हालांकि, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ की असाधारण सुनवाई में बहुत ही हंगामेदार बहस के बाद इस आदेश को समाप्त कर दिया। हंगामा ऐसा रहा कि एडवोकेट प्रशांत भूषण मुख्य न्यायाधीश की अदालत से गुस्से में बाहर चले गए। उनको गुस्सा इस बात से हुई कि पीठ ने उनकी दलील सुनने से मना कर दिया।

कोर्ट में उस दिन क्या हुआ उसका पूरा ब्योरा आप इस लिंक पर क्लिक करके सुन सकते हैं : 10/11 [Friday] [3PM To 4.35PM] –Supreme Court Of India- Court No:I

मुश्किलों का पिटारा

इस पूरे मामले की शुरुआत पूर्व हाई कोर्ट जज आईएम कुद्दुसी के खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट दायर करने से हुई।

इस एफआईआर के मुताबिक़, कुद्दुसी ने एक महिला भावना पांडेय के साथ मिलकर तथाकथित रूप से प्रसाद इंस्टीच्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस, लखनऊ से संबंधित मामले को “सेटल” करने का षड्यंत्र रचा। यह मेडिकल कॉलेज उन 46 कॉलेजों में एक है जिस पर सरकार ने प्रतिबन्ध लगा दिया है। इसके मुताबिक़, इस मेडिकल संस्थान के कामकाज को देखने वाले बीपी यादव ने कुद्दुसी और पांडेय से संपर्क किया और फिर इनके साथ मिलकर इस मामले को “सेटल” करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा।

कुद्दुसी ने तथाकथित रूप से यादव को सलाह दिया था कि वह प्रतिबन्ध के खिलाफ अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ले और इस मामले में वह इलाहाबाद हाई कोर्ट की शरण में जाएं। हाई कोर्ट ने इसके बाद प्रतिबन्ध पर अंतरिम स्थगनादेश दे दिया।

हालांकि, मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने इस स्थगन आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील किया, कुद्दुसी और पांडेय ने तथाकथित रूप से यादव को यह आश्वासन दिया है कि “अपने संपर्कों के माध्यम से वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट से सेटल करवा लेंगे”।

अब इस स्थिति में मेडिकल कॉलेजों से संबंधित मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा होना काफी दिलचस्प होगा।

अब भ्रष्टाचार के इन आरोपों की जांच के लिए याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

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