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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, NRI वोटिंग बिल शीतकालीन सत्र में

LiveLaw News Network
10 Nov 2017 5:16 PM GMT
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, NRI वोटिंग बिल शीतकालीन सत्र में
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केंद्र सरकार  ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में प्रवासी  भारतीयों ( NRI ) को  पोस्ट या  ई बैलेट  के जरिये मतदान की अनुमति देने के लिए कानून में संशोधन वाला विधेयक पेश किया जाएगा।

चीफ जस्टिस  दीपक मिश्रा, जस्टिस ए  एम खानवेलकर और डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने केन्द्र की दलीलों पर विचार किया और NRI के लिए मताधिकार के अनुरोध वाली याचिकाओं पर सुनवाई टालने पर सहमति जताई।

वहीं केन्द्र की ओर से पेश वकील पी के डे ने इस आधार पर छह महीने के लिए सुनवाई टालने का अनुरोध किया कि इस  विधेयक को आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। हालांकि बेंच ने ये सुनवाई 12 हफ्तों के लिए टाल दी है।

दरअसल अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने 21 जुलाई को कोर्ट में कहा था कि जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत दिये नियमों में बदलाव करके NRI  को मतदान की अनुमति नहीं दी जा सकती और मताधिकार के लिए कानून में संशोधन   के लिए संसद में विधेयक पेश करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को केन्द्र से इस बारे में फैसला करने को कहा था कि वो NRI को डाक या ई वैलेट से मतदान की अनुमति के लिए चुनाव कानून या नियम में बदलाव करेगा या नहीं।

केंद्र सरकार ने 21 जुलाई को कहा था कि वो  NRI को वोटिंग का अधिकार देने के लिए कानून में बदलाव को तैयार है।  केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वो NRI को भी वोटिंग का अधिकार देने के लिए जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 में संशोधन करने को तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दो हफ्ते में केंद्र सरकार बताए कि संशोधन के लिए बिल संसद में कह रखा जाएगा। हालांकि केंद्र ने कहा था कि वर्तमान सत्र में ये संभव नहीं है। वो केंद्र सरकार से निर्देश लेंगे। केंद्र ने बताया था कि करीब दस लाख NRI में से सिर्फ दस हजार लोग ही देश मे आकर वोट डालते हैं।

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