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लंबित मामलों को घूस देकर सुलझाने के मामले में कामिनी जायसवाल की याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ करेगी [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
9 Nov 2017 2:31 PM GMT
लंबित मामलों को घूस देकर सुलझाने के मामले में कामिनी जायसवाल की याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ करेगी [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जे चेल्मेश्वर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने एडवोकेट कामिनी जायसवाल की याचिका को पांच वरिष्ठ जजों की संवैधानिक पीठ को सौंप दिया है। जायसवाल ने अपनी याचिका में लंबित मामलों को घूस देकर सुलझाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी।

जायसवाल की और से मामले की पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने मामला किस तरह सामने आया इस पर गौर करने और इस बारे में उचित आदेश देने का आग्रह किया। दवे ने कहा, “अनाम सार्वजनिक सेवक को भारी लालच दने का आरोप है”। उन्होंने आगे कहा कि सीबीआई ने अभियुक्त को जमानत दिए जाने के खिलाफ अपील नहीं की। उन्होंने पूछा कि क्या सीबीआई ने इस संस्था की छवि को बिगाड़ने के लिए एक झूठा मामला दर्ज किया है?

जब पीठ ने इस मामले को संवैधानिक पीठ को सौंपने का निर्णय किया तो दवे ने कहा कि सीबीआई ने कुछ बहुत ही अभियोगात्मक दस्तावेज जब्त किए हैं और अंतरिम बचाव की जरूरत है। इसके बाद पीठ ने रजिस्ट्री को उन दस्तावेजों को हासिल करने के निर्देश दिए और उन्हें सीलबंद लिफ़ाफ़े में रखने को कहा जिसे सोमवार को संवैधानिक पीठ के समक्ष पेश किया जाएगा।

जब दवे ने यह कहा कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र को इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ में नहीं होना चाहिए क्योंकि उन्होंने लंबित मामले की सुनवाई की थी जिसमें घूस दने के आरोप लगाए गए थे, तो न्यायमूर्ति चेल्मेश्वर ने उन्हें अपने आदेश को पढ़कर सुनाया। इसमें कहा गया था कि पीठ में प्रथम पांच जज शामिल होंगे और यह स्पष्ट नहीं किया कि मुख्य न्यायाधीश इसका हिस्सा होंगे कि नहीं या फिर यह उन पर ही छोड़ दिया जाता है कि वे खुद को इस सुनवाई से अलग कर लें या अपने को अलग करने के अनुरोध का जवाब अपने वकील के माध्यम से दें।

आदेश में कहा गया :

वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने इस मामले के विभिन्न पक्षों पर अपनी राय रखी है, और इसके बारे में हम विस्तार से इस आदेश में नहीं बताएंगे। लेकिन यह बताना हमारा कर्तव्य है कि जब इस मामले की सुनवाई हो रही थी, रजिस्ट्री का अधिकारी कार्यवाही की एक फोटोप्रति को सामने रखा जिसे ऐसा कहा जाता है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने जारी किया था और इसकी एक कॉपी इस आदेश के साथ संलग्न है।

मामले की परिस्थिति को देखते हुए हमें इसे पांच सदस्यीय संविधान पीठ को सुनवाई के लिए सौंपना उचित लगा। ये पांच जज कोर्ट के वरिष्ठतम जज होंगे जो इसमें शामिल होंगे। हमने इस मामले की सुनवाई की तिथि भी सोमवार 13 नवंबर 2017 निर्धारित की है।


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