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पदाधिकारियों का चुनाव रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अखिल भारतीय फुटबाल संघ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

LiveLaw News Network
8 Nov 2017 2:36 PM GMT
पदाधिकारियों का चुनाव रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अखिल भारतीय फुटबाल संघ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
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अखिल भारतीय फुटबाल संघ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने संघ के अध्यक्ष प्रफुल पटेल सहित उसके पदाधिकारियों के चुनाव को रद्द कर दिया था और पांच महीने के भीतर दुबारा चुनाव कराने का आदेश दिया था।

न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर शीघ्रता से सुनवाई का अनुरोध करते हुए संघ के वकील अमित आनंद तिवारी ने कहा कि कोर्ट के इस कदम से एआईएफएफ की अंतरराष्ट्रीय फुटबाल संघ (एफआईएफए) द्वारा मान्यता समाप्त कर देने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है।

तिवारी ने कहा, “एफआईएफए सिर्फ चुने हुए निकाय को मान्यता देता है और हाई कोर्ट के आदेश के बाद इसकी मान्यता समाप्त कर दिए जाने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है।”

तिवारी ने यह भी कहा कि चूंकि कोई चुना हुआ निकाय नहीं है, इसलिए भारत 2019 में आयोजित होने वाले यू-20 वर्ल्ड कप के लिए आवेदन नहीं कर सकता। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 14 नवंबर है। उन्होंने इस आधार पर मामले की शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया।

तिवारी ने अपनी याचिका में संघ की चुनाव प्रक्रिया का बचाव किया है और कहा कि जिस चुनाव को रद्द करने का आदेश दिया गया है उसे “आवेदनकर्ता ने लोकतांत्रिक तरीके और इसके संविधान के अनुरूप आयोजित किया और इस क्रम में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई।”

आवेदनकर्ता की याचिका पर गौर करने के बाद कोर्ट ने इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्णय किया है।

पिछले 31 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने एआईएफएफ के अध्यक्ष के रूप में लगातार तीसरी बार पूर्व केंद्रीय उड्डयन मंत्री प्रफुल पटेल और वर्ष 2017-2020 की अवधि के लिए कार्यपालक समिति के चुनाव को रद्द कर दिया।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि चुनाव में राष्ट्रीय खेल संहिता का ध्यान नहीं रखा गया था और इसलिए दुबारा पांच महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया था। इस बीच न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट और न्यायमूर्ति नाज़्मी वज़ीरी की पीठ ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी को संघ का प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था।

कोर्ट का यह आदेश एडवोकेट राहुल मेहरा की याचिका पर सुनवाई के बाद आया। मेहरा ने अपनी याचिका में कहा था कि चुनाव में खेल संहिता का ख़याल नहीं रखा गया।

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