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ट्रांसजेंडर की केबिन क्रू बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया, उड्डयन मंत्रालय को नोटिस जारी किया [याचिका पढ़े]

LiveLaw News Network
6 Nov 2017 11:59 AM GMT
ट्रांसजेंडर की केबिन क्रू बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया, उड्डयन मंत्रालय को नोटिस जारी किया [याचिका पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने  एक ट्रांसजेंडर की याचिका पर एयर इंडिया और केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में केबिन क्रू के तौर पर नियुक्ति की गुहार लगाई गई है।

दरअसल याचिकाकर्ता शान्वी पोन्नूस्वामी ने पहले सदरलैंड व एयर इंडिया में कस्टमर सपोर्ट में काम किया है और इसी दौरान उसने अपनी सर्जरी करा ली थी। इंजीनियरिंग स्नातक पोन्नूस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 में दिए गए NALSA फैसले का हवाला दिया है जिसमें ट्रांसजेंडर को तीसरी कैटेगरी में रखने के आदेश जारी किए गए थे।

याचिका में कहा गया है कि इस संबंध में उसने परीक्षा में अच्छा किया और मंत्रालय समेत प्रधानमंत्री को भी ज्ञापन दिया लेकिन किसी ने नहीं सुना।

ट्रांसजेंडर ने अपनी याचिका में कहा है कि वो तीसरी कैटेगरी में आती हैं। लेकिन एयर इंडिया में केबिन क्रू केवल महिलाओं के लिए हैं। उसने परीक्षा में अच्छा करने के बाद उसने चार  बार केबिन क्रू के लिए कोशिश की लेकिन उसका नाम लिस्ट में नहीं आया।

ट्रांसजेंडर का कहना है कि एयर इंडिया ने 400 भर्तियां निकाली थी लेकिन ट्रांसजेंडर होने की वजह से उसे नही चुना गया। जब इस मामले को लेकर वो मंत्रालय गईं लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। यहां तक कि एयर इंडिया के CMD भी उससे नहीं मिले।

याचिका में हवाला दिया गया है कि 15 अप्रैल  2014 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रांसजेंडर को तीसरी केटेगरी में रखा जाए और OBC कोटा दिया जाए। इस फैसले को सुनाते हुए जस्टिस के एस राधाकृष्णन और जस्टिस ए के सिकरी  ने कहा था कि ट्रांसजेडक की तीसरे लिंग के आधार पर पहचान कोई मेडिकल या सामाजिक मुद्दा नहीं बल्कि मानवाधिकार का मुद्दा है।

बेंच ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में कानून के सामने समानता और कानून के समान सरंक्षण का अधिकार दिया गया है। लैंगिक पहचान का अधिकार गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार के तहत है जो अनुच्छेद 21 के दायरे में है।


 
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