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दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रफुल पटेल को भारतीय फुटबाल संघ के अध्यक्ष पद से हटाया; एसवाई कुरैशी इसके प्रशासक नियुक्त, पांच महीने के अंदर होंगे नए चुनाव [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
6 Nov 2017 10:17 AM GMT
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रफुल पटेल को भारतीय फुटबाल संघ के अध्यक्ष पद से हटाया; एसवाई कुरैशी इसके प्रशासक नियुक्त, पांच महीने के अंदर होंगे नए चुनाव [निर्णय पढ़ें]
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दिल्ली हाई कोर्ट ने अखिल भारतीय फुटबाल संघ (एआईएफएफ) के अध्यक्ष प्रफुल पटेल सहित उसके सभी पदाधिकारियों के चुनाव को रद्द घोषित कर दिया है। कोर्ट ने पांच महीने के अंदर संघ का फिर से चुनाव कराने को कहा है।

इस बीच न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति नजमी वज़ीरी की पीठ ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी को संघ का प्रशासक नियुक्त किया है।

संघ के पदाधिकारियों के चुनाव को चुनौती देने वाले राहुल मेहरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उक्त आदेश दिए। मेहरा ने अपनी याचिका में कहा कि पिछले साल दिसंबर में हुए संघ के चुनाव में राष्ट्रीय खेल संहिता का उल्लंघन हुआ। यह संहिता युवा और खेल मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश है जिसे 2011 में जारी किया गया। इसका उद्देश्य सरकारी सहयोग पर निर्भर खेल संघों में पारदर्शिता लाने और उन्हें उत्तरदाई बनाना है।

मेहरा ने अपनी याचिका में कहा था कि खेल संहिता के अनुसार यह जरूरी है कि हर उम्मीदवार को एक सदस्य संघ नामित करे और दूसरा सदस्य उसका समर्थन करे। लेकिन एआईएफएफ ने कहा कि हर उम्मीदवार को संघ के पांच सदस्यों द्वारा नामित किया जाना चाहिए।

कोर्ट के संज्ञान में यह बात भी लाई गई कि प्रस्तावित चुनाव के मात्र 9 दिन पहले चुनाव सूची की घोषणा की गई जबकि नियमतः प्रस्तावित चुनाव से कम से कम 30 दिन पहले इसकी घोषणा होनी चाहिए थी। यह भी आरोप लगाया गया कि चुनाव सूची को वोट के दिन बदल भी दिया गया।

याचिकाकर्ता की इन बातों से इत्तफाक जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा, “कोर्ट का यह मानना है कि (1) चुनाव सूची नहीं होने के कारण इसे उम्मीदवारों के साथ साझा नहीं किया गया (2) आवेदक सोसाइटी के अनुसार वोट देने वाले पांच सदस्य होने चाहिए (3) राष्ट्रीय खेल संहिता के प्रारूप को नहीं मानना (4) कुछ सदस्यों को चुनाव में भाग लेने से पूरी तरह रोकना – विशेषकर दिल्ली फ़ुटबाल संघ को। और इन वजहों से राष्ट्रीय खेल संहिता के मुताबिक़ इस चुनाव को वैध नहीं माना जा सकता...

... कोर्ट का यह मानना है कि एआईएफएफ के नियम राष्ट्रीय खेल संहिता और चुनाव कराने के आदर्श दिशानिर्देशों के खिलाफ हैं, इसलिए 21 दिसंबर 2016 को घोषित चुनाव परिणाम को रद्द करना पड़ेगा। यह आदेश है।”

इसलिए फिर से खेल संहिता के आदर्श दिशानिर्देशों के अनुरूप चुनाव कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कोर्ट ने कुरैशी को निर्देश दिया :

“(1) 30 नवंबर 2016 तक मौजूद एआईएफएफ की इकाइयों/सदस्यों की असंबद्धता के मामले को सुलझाएं और एक महीना के भीतर चुनाव सूची तैयार करें ताकि संबंधित पक्षकारों को दो सप्ताहों का नोटिस दिया जा सके;

(2) सूची तैयार होने के छह सप्ताह के भीतर चुनाव होना चाहिए। चुने हुए पदाधिकारियों की यह निकाय एआईएफएफ के संविधान में जरूरी संशोधन करेगा ताकि यह राष्ट्रीय खेल संहिता के अनुरूप हो सके;

(3) एआईएफएफ के संविधान में संशोधन हो जाने के बाद राष्ट्रीय खेल संहिता के अनुरूप चुनाव कराया जाए ताकि उम्र और अवधि संबंधी नियमों और खिलाड़ियों को पर्याप्त तरजीह देने के प्रावधानों का सख्ती से पालन हो सके;

(4) एआईएफएफ प्रशासकों को उपयुक्त कार्यालय और अन्य सुविधाएं मुहैया कराएगा ताकि वे उपर्युक्त दिशानिर्देशों का पालन कर सकें। वह प्रशासकों को उनकी मांगों के अनुरूप उनकी मदद के लिए स्टाफ एवं अन्य लोग उपलब्ध कराएगा और इस पर आने वाला खर्च भी एआईएफएफ उठाएगा;

(5) जब तक चुनाव नहीं हो जाते हैं और राष्ट्रीय खेल संहिता के अनुरूप परिणामों की घोषणा नहीं हो जाती, एआईएफएफ प्रशासक की पूर्व अनुमति के अलावा किसी भी तरह की नई वित्तीय प्रतिबद्धता घोषित नहीं करेगा। एआईएफएफ के सामान्य खर्चे के लिए भी प्रशासक की पूर्व अनुमति लेनी होगी। ये सारे काम प्रशासक के कार्यभार संभालने के पांच महीने के भीतर पूरे हो जाएंगे।

(6) अगर इस बीच आवेदक किसी प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट के आयोजन के लिए आवेदन करता है, तो इस आयोजन में किसी भी तरह की रुकावट नहीं हो इसलिए यह आदेश दो सप्ताह के बाद लागू होगा।”


 
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