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आईपीसी की धारा 498A का दुरुपयोग रोकने के लिए दिल्ली के 11 जिलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर परिवार कल्याण समिति का गठन

LiveLaw News Network
1 Nov 2017 9:01 AM GMT
आईपीसी की धारा 498A का दुरुपयोग रोकने के लिए दिल्ली के 11 जिलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर परिवार कल्याण समिति का गठन
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दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) ने दिल्ली के सभी 11 जिलों में तीन सदस्यीय परिवार कल्याण समिति का गठन कर दिया है। ऐसा भारतीय दंड संहिता की धारा 498A का दुरुपयोग रोकने के लिए किया गया है।

इस वर्ष जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद यह कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वह हर जिले में एक या एक से अधिक परिवार कल्याण समिति का गठन करे।

सभी 11 परिवार कल्याण समितियों में एक चेयरमैन के अलावा दो सदस्य हैं और अब इन समितियों ने काम करना शुरू कर दिया है। इन समितियों की अध्यक्षता करने वाले जिला और सत्र न्यायाधीश हैं जो अपने-अपने जिलों में जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों के प्रमुख हैं। उत्तर पश्चिम जिला के परिवार कल्याण समिति के अध्यक्ष को नामित करना अभी बाकी है।

इन समितियों के बारे में विवरण डीएसएलएसए के सदस्य सचिव संजीव जैन द्वारा जारी एक सर्कुलर से उपलब्ध कराया गया।

अब से दहेज़ के कारण मृत्यु, घरेलू हिंसा के बारे में पुलिस या मजिस्ट्रेट को शिकायत जैसे सभी मामले इन्हीं समितियों को भेजे जाएंगे।

किसी भी मामले में किसी भी तरह की गिरफ्तारी कल्याण समिति के सुझाव पर ही हो सकता है जिसे मामले से जुड़े परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क साधने के एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2017 में राजेश शर्मा एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश एवं अन्य मामले में अनेक दिशानिर्देश जारी किए जिसमें परिवार कल्याण समितियों की स्थापना का निर्देश भी शामिल था।

राजेश शर्मा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सुनवाई अदालत द्वारा राजेश शर्मा के माता-पिता और भाई-बहन के खिलाफ जारी सम्मन को निरस्त करने से इनकार कर दिया था। राजेश शर्मा की पत्नी ने उसके खिलाफ उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था।


 
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