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शार्टहैंड नोट न्यायिक रिकार्ड का हिस्सा नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सहमति जताई

LiveLaw News Network
30 Oct 2017 2:26 PM GMT
शार्टहैंड नोट न्यायिक रिकार्ड का हिस्सा नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सहमति जताई
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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने 23 अक्तूबर को कहा है कि उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के 25 मई के आदेश में दखल देने का कोई आधार नजर नहीं आता जिसमें RTI आवेदक तपन चौधरी की याचिका पर सहमति नहीं जताई गई थी। इसमें तपन ने कोर्ट के दिए निर्देशों पर स्टेनोग्राफर द्वारा लिए गए शार्टहैंड नोट की प्रति की मांग की गई थी।

दरअसल तपन ने एक निश्चित तारीख को एक केस में दिल्ली हाईकोर्ट के जज द्वारा दिए गए निर्देशों की शार्टहैंड नोटस की कॉपी मांगी थी। 15 अक्तूबर 2015 को CPIO ने इसका जवाब देते हुए कहा था कि ऐसा रिकार्ड नहीं रखा जाता और ये उपलब्ध नहीं है। तपन की पहली अपील खारिज कर दी गई। वहीं केंद्रीय सूचना आयोग  ने भी 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट की फुल बेंच के सुप्रीम कोर्ट सेकेट्री जनरल बनाम सुभाष अग्रवाल मामले में फैसले के आधार पर दखल देने से इंकार कर दिया। इस फैसले में हाईकोर्ट ने कहा था कि साइन किए हुए ड्राफ्ट जजमेंट और एक दूसरे जज को भेजे हुए ड्राफ्ट जजमेंट फाइनल जजमेंट नही होंगे और ये इसे सूचना का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

इस मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि स्टेनो को शार्टहैंड में लिखाए गए आदेश को मेमो माना जाएगा जिसे ड्राफ्ट आदेश या फैसले के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। जब ड्राफ्ट आदेश को ही पब्लिक अथारिटी के रिकार्ड के तौर पर नहीं माना जाता तो मेमो के तौर पर शार्टहेंड के नोट को कैसे स्वीकारा जा सकता है।

वहीं खंडपीठ के सामने याचिकाकर्ता का कहना था कि RTI एक्ट के मुताबिक मेमो एक सूचना है। ऐसे में जजों द्वारा स्टेनो को शार्टहैंड में दिए ड्राफ्ट आदेश को भी सूचना माना जाएगा और इसका खुलासा किया जा सकता है। लेकिन जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस विनोद गोयल ने एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा।

पेशे से वकील तपन चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में इस केस की खुद पैरवी की थी।

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