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दागी अफसरों को गुजरात चुनाव में मुख्य ड्यूटी पर तैनात ना करें: सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
30 Oct 2017 9:00 AM GMT
दागी अफसरों को गुजरात चुनाव में मुख्य ड्यूटी पर तैनात ना करें: सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान किसी भी ऐसे अफसर को मुख्य चुनावी ड्यूटी पर ना लगाया जाए जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है।

सोमवार को कांग्रेस की याचिका में इस प्रार्थना को मंजूर करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने याचिका का निस्तारण कर दिया। बेंच ने अन्य कोई निर्देश देने से इंकार कर दिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि मतदाता की वीडियो रिकार्डिंग करने के आदेश भी नहीं दिए जा सकते।

सुनवाई के दौरान AG के के वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा कि इस संबंध में जो भी याचिका में कहा गया है वो सब चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद है।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग को इस संबंध में ज्ञापन भी दिया गया था और ये मांग अहम हैं। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को मान लिया कि जिन अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, उन्हें चुनाव के दौरान अहम ड्यूटी पर ना लगाया जाए।

दरअसल गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। गुजरात में चुनाव फ्री एंड फेयर और पारदर्शी हों, अर्जी में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से इसके लिए कदम उठाने की मांग की थी।

 सुप्रीम कोर्ट ने AICC सचिव प्रकाश जोशी की याचिका की कॉपी अटॉर्नी जरनल और चुनाव आयोग को देने को कहा था और उनका पक्ष पूछा है।

सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था  कि इस संबंध में चुनाव आयोग को ज्ञापन दिया गया था लेकिन आयोग ने सभी कदम नहीं उठाए हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट चुनाव को पारदर्शी बनाने के लिए दिशा निर्देश जारी करें।

गौरतलब है कि AICC के सचिव प्रकाश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि चुनाव के दौरान सभी मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी लगाए जाएं और हर मतदाता को कैमरे में रिकार्ड किया जाए। कुछ वक्त के बाद मतदान प्रतिशत की घोषणा की जाए।

साथ ही चुनाव में VVPAT मशीनों के साथ बकायदा पेपर ट्रेल हो जिसे मतदाता द्वारा  पढा जा सके। इसके लिए मतदाता को जागरूक किया जाए। इन पेपर ट्रेल को कम से कम 120 दिनों तक सुरक्षित रखा जाए ताकि कोई सवाल उठने पर  इन ट्रेल से गिनती की जा सके।

इसके अलावा याचिका में कहा गया था कि चुनाव के दौरान अपराधियों को पेरोल ना दिया जाए और ठेका कर्मियों को चुनाव ड्यूटी पर ना लगाया जाए  सभी ईवीएम मशीनों व पेपर ट्रेल को  सुरक्षित रखा जाए। प्रकाश जोशी ने अपनी याचिका में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि उन अधिकारियों को चुनाव की ड्यूटी पर न रखा जाए जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है।

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