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आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की याचिका खारिज की

LiveLaw News Network
26 Oct 2017 7:21 AM GMT
आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की याचिका खारिज की
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सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज FIR को रद्द करने की हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक गुप्ता ने 82 साल के वीरभद्र सिंह की याचिका तकनीकी आधार पर खारिज की है क्योंकि इसमें खामियों को दूर नहीं किया गया। साथ ही उनकी ओर से कोई वकील कोर्ट में पेश नहीं  हुआ।

दरअसल वीरभद्र सिंह ने अप्रैल महीने में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 31 मार्च के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें राहत नहीं मिली थी। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को गलत बताते हुए तत्काल रोक लगाने की गुहार की थी।

इसी साल अप्रैल में आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज FIR को रद्द करने के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

वीरभद्र सिंह ने 31 मार्च के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश  को चुनौती दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने वीरभद्र और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ आय से अधिक मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की गुहार ठुकरा दी थी। साथ ही हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा उनकी गिरफ्तारी और बिना अदालत की अनुमति में चार्जशीट दाखिल करने पर लगी रोक भी हटा ली थी। इसके अगले ही दिन सीबीआई ने वीरभद्र और उनकी पत्नी समेत कई अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कथित रूप से 10 करोड़ रुपये के आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति मामले में एक विशेष अदालत में दाखिल चार्जसीट 500 से ज्यादा पन्नों की है। इसमें दावा किया गया है कि सिंह ने करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की जो केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनकी कुल आमदनी से 192 प्रतिशत अधिक है।वीरभद्र और आठ अन्य लोगों के खिलाफ कथित अपराध के लिए भ्रष्टाचार रोकथाम कानून और आईपीसी की धारा 109 (उकसाने) और 465 (जालसाजी के लिए सजा) के तहत दायर अंतिम रिपोर्ट में 225 गवाहों और 442 दस्तावेजों को रखा गया है। कांग्रेस नेता और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के अलावा रिपोर्ट में चुन्नी लाल चौहान, जोगिंदर सिंह घल्टा, प्रेम राज, वकामुल्ला चंद्रशेखर, लवन कुमार रोच और राम प्रकाश भाटिया को आरोपी बनाया गया है।

हालांकि 29 मई 2017 को पटियाला हाउस कोर्ट ने सीबीआई के पुरजोर विरोध के बावजूद वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी को एक-लाख के मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही उन्हें पासपोर्ट जमा कराने के आदेश दिए गए।

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