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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के दफ्तरों से आरओ सिस्टम हटाने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाया [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
24 Oct 2017 2:46 PM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के दफ्तरों से आरओ सिस्टम हटाने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाया [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक  लगा दी है जिसमें कहा गया था कि आरओ सिस्टम को सरकारी अधिकारियों के घर या दफ्तर से हटा दिए जाएं। हाई कोर्ट ने एक पीआईएल पर सुनवाई के दौरान उक्त आदेश पारित किया था। अदालत ने सरकार को चेतावनी दी और कहा कि अगर नियम के तहत लड़कियों के संस्थानों में आरओ नहीं लगाया गया तो जिलाधिकारी और अन्य सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों के घर में लगे आरओ सिस्टम को हटाकर उन्हें लड़कियों के संस्थानों लगाया दिया जाएगा।

हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को इस बात की इजाजत नहीं दी जा सकती कि वह संस्थानों में रहने वाली लड़कियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करें।

अगर जिलाधिकारी यह समझते हैं कि जो पानी स्थानीय निकाय आपूर्ति कर रही है और उसके लिए अगर आरओ सिस्टम की जरूरत है तो फिर लड़कियों के संस्थानों के लिए भी वह पानी पीने योग्य नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र भारत में उनका भी मानवीय अधिकार उतना ही है। अगर संविधान के अनुच्छेद 21 को सही तरह से परिभाषित किया जाए तो साफ पानी अनिवार्य है और वह सरकारी संस्थानों और स्कूलों के लिए भी अनिवार्य है। हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य की भावी पीढी को बचाने की जरूरत है और उन्हें स्वास्थय समस्याओं से बचाना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि पानी की क्वालिटी को सुनिश्चित करना जरूरी है। जिलाधिकारी के लिए उनके घर और ऑफिस में आपूर्ति होने वाला पानी और महिला इंटर कॉलेज में आपूर्ति होने वाले पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

हाई कोर्ट के उक्त आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और हाई कोर्ट के इस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई कर सकता है  ताकि महिला कॉलेजों को लाभ हो सके। हाई कोर्ट इस दौरान देख सकता है कि संस्थानों में आरओ लग सकता है या नहीं।


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