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सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों मानते हैं कानूनी पेशे की निगरानी के लिए स्वतंत्र निकाय की जरूरत

LiveLaw News Network
23 Oct 2017 9:37 AM GMT
सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों मानते हैं कानूनी पेशे की निगरानी के लिए स्वतंत्र निकाय की जरूरत
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केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट कानूनी पेशे में फीस और उसकी आचारसंहिता की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र निकाय की स्थापना के पक्ष में है।

इकनोमिक टाइम्स अखबार में छपी एक खबर के अनुसार सरकार और सुप्रीम कोर्ट के प्रतिनिधियों के बीच हाल में हुई एक बैठक में इस बात पर सहमति जताई गई कि कानूनी पेशे के लिए ली जाने वाली फीस की निगरानी की जरूरत है।

खबर में में बताया गया है कि बैठक के विवरणों के अनुसार, “कानूनी पेशे के लिए एक निगरानी ढाँचे की आवश्यकता की समीक्षा जरूरी है। कानूनी फीस और इस पेशे से जुडी आचारसंहिता की निगरानी को बार काउंसिल के चुने हुए सदस्यों की बजाय एक स्वतंत्र निकाय अंजाम दे सकता है”।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बैठक में न्याय विभाग ने व्यावसायिक करारों को विश्वस्तर पर विश्वस्त नहीं बना पाने के लिए निगरानी व्यवस्था के अभाव को जिम्मेदार बताया। विभाग ने कहा, “कानूनी पेशे की असंतोषजनक निगरानी के कारण विश्व बैंक के ‘डूइंग बिजनेस रिपोर्ट’ के तहत करार के प्रावधानों को लागू करने में भारत की रैंकिंग को सुधारने में रोड़ा बन रहा है।”

देश के लॉ कमीशन के कई रिपोर्टों में इस बात का जिक्र भी काफी जोरदार तरीके से किया गया है कि कुछ बेलगाम वकीलों द्वारा अपने कार्यों का बहिष्कार करने के कारण उनके मुवक्किलों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

फिर, वकीलों द्वारा अपने मुवक्किलों को दिए जाने वाली सेवाओं में सुधार के लिए यह सुझाया गया कि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया अपने वकीलों के प्रदर्शन के बारे में मुवक्किलों की राय जानने की प्रक्रिया की शुरुआत कर सकता है। इसके लिए एक वेबसाइट भी शुरू करने का सुझाव दिया गया ताकि मुवक्किल अपने अनुभव और अपनी शिकायतें साझा कर सकें।

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