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मदरसों में राष्ट्र गान गाने संबंधी उप्र सरकार के आदेश के खिलाफ याचिका खारिज [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
20 Oct 2017 9:25 AM GMT
मदरसों में राष्ट्र गान गाने संबंधी उप्र सरकार के आदेश के खिलाफ याचिका खारिज [आर्डर पढ़े]
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इलाहबाद हाई कोर्ट ने उतर प्रदेश के मदरसों में राष्ट्र गान को अनिवार्य बनाने के सरकारी आदेश के खिलाफ याचिका खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्र गान गाना न केवल एक संवैधानिक कार्य है बल्कि यह लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता की भावना फैलाता है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप बी भोंसले ने अपने फैसले में कहा, “राष्ट्र गान और झंडे के महत्त्व के संदेश को सभी शिक्षा संस्थानों तक फैलाने की जरूरत है भले ही वे कहीं से भी जुड़े हों और कैसे भी हों।”

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी निर्देश में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी मदरसों से स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों को रिकॉर्ड करने का आदेश दिया था। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी आदेश दिया था कि सभी मदरसों में राष्ट्र गान गाना और झंडा फहराना अनिवार्य होगा।

इस आदेश के खिलाफ न्यायालय में अपील करने वाले अलाउल मुस्तफा ने कहा कि राष्ट्र गान गाने के लिए बाध्य करना “राष्ट्रवाद को थोपना है” और जो लोग अपनी आस्था और रिवाज के कारण इसे गाना नहीं चाहते और इसको सुनाना नहीं चाहते उनको ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अलाउल मदरसा चलाने वाले एक संस्थान के सचिव हैं।

पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता को सलाह दी जाती है कि वह संविधान में दिए नागरिकों के कर्तव्यों के बारे में जाने जिसे एक नागरिक के रूप में हमने अपने मन में उतारा है और उसे अंगीकार किया है लेकिन वर्तमान याचिका जैसे प्रयास नागरिकों के हितों की रक्षा और उसको सुरक्षित करने के बजाय समाज में कटुता और वैमनस्य को जन्म देते हैं। इस तरह के प्रयासों का विरोध ही किया जा सकता।

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 51A का हवाला देते हुए कहा, “सही अर्थों में राष्ट्र गान को गाना हर नागरिक का कर्तव्य है और इस देश के इतिहास और उसकी महान परंपरा का आदर करना है और यह अंततः देश के नागरिकों में इसके बावजूद कि वे किस धर्म के हैं, कौन सी भाषा बोलते हैं और किस क्षेत्र के हैं, बंधुत्व का भाव भरता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष नवंबर में देश के सभी सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्र गान सुनाए जाने और इस दौरान स्क्रीन पर राष्ट्रीय झंडे दिखाने का आदेश दिया था।


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