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क्या पटाखा पर दोबारा बैन हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट कल बच्चों की अर्जी पर करेगी सुनवाई

LiveLaw News Network
5 Oct 2017 3:40 PM GMT
क्या पटाखा पर दोबारा बैन हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट कल बच्चों की अर्जी पर करेगी सुनवाई
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दिवाली से दो हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट कल तीन बच्चों अर्जुल गोपाल और अन्य की अर्जी पर सुनवाई करेगा जिसमें याचिकाकर्ता ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखे की बिक्री पर बैन की गुहार लगाई है। पिछले साल बिक्री पर बैन किया गया था उसी आदेश को बहाल करने की गुहार लगाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर 12 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल के 11 नवंबर के अादेश में बदलाव किया था और तत्कालीन तौर पर पटाखे की बिक्री पर लगी बैन को हटा दिया था। जस्टिस मदन बी लोकूर ने इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान खुद को अलग कर लिया था जिसके बाद अब मामले में जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण सुनवाई करेंगे और सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की गई है। याची के वकील शंकर नारायणन ने कहा कि सीपीसीबी (सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड) और अन्य अथॉरिटी जैसे दिल्ली सरकार आदि ने सही तथ्य पेश नहीं किए हैं। याचिका में कोर्ट के सामने कुछ तथ्य और दस्तावेज पेश किए गए हैं जिसमें 12 सितंबर 2017 के बाद के तथ्य पेश किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने कहा है कि सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कई तथ्य छुपाए हैं और यही कारण है कि 12 सितंबर के आदेश में पटाखा बिक्री पर बैन हटाने का आदेश पारित हुआ है।

जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के 11 सितंबर के आदेश में बदलाव किया था और पटाखे की बिक्री पर रोक हटा दी थी और कहा था कि सरकार की संबंधित अथॉरिटी इस बात को सुनिश्चित करे कि पटाखा साइलेंस जोन में न बिके। साथ ही शर्त लगाई गई थी कि दिल्ली पुलिस 500 से ज्यादा दुकानदारों को पटाखे बेचने की लाइसेंस जारी न करे।

सीपीसीबी ने अब इस बात का खुलासा किया है कि 20 साल पहले ये स्टैंड लिया गया था कि सल्फर पटाखे में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए क्योंकि ये सल्फर डायऑक्साइड बनाता है और ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सगुन कौशिक बनाम लेफ्टिनेंट गवर्नर दिल्ली और अन्य (सीडब्ल्यूपी 3364/ 1997) में सीपीसीबी ने कहा था कि रात 9 बजे से लेकर देर रात दिवाली के रोज सल्फर डायऑक्साइज की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है। हाई कोर्ट को बताया गया था कि इसका लेवल खतरनाक लेवल तक पहुंच जाता है। इस मामले में नया आईए शुक्रवार को सुना जाएगा। याचिकाकर्ता ने कहा कि सीपीसीबी ने खासकर कहा है कि पटाखा बैन होना चाहिए। और इस बाबत दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 4 नवंबर 1996 को लेकर लिखा था। दिल्ली पुलिस और न ही सीपीसीबी ने इस तथ्य को बताया।

आईए में कहा गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था और उसने 14 सितंबर 1998 को रिपोर्ट पेश की थी जिसमें वन और पर्यावरण मंत्रालय और सीपीसीबी की दलील को रखा गया था। जिसने सिफारिश की थी कि रॉकेट और अन्य आसमान में जाने वाले पटाखों साथ ही जॉइंट पटाखे जैसे अटॉम बम और मरून्स को बैन किया जाए। लेकिन इन तमाम तथ्यों को सभी पार्टियों ने छुपाया है। जबकि इन तथ्यों से ये पहले से अवगत हैं।

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