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सुप्रीम कोर्ट ने दवे की सरकार समर्थक जजों की टिप्पणी को खारिज किया, सोशल मीडिया की टिप्पणियों पर जताई चिंता

LiveLaw News Network
5 Oct 2017 10:31 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने दवे की सरकार समर्थक जजों की टिप्पणी को खारिज किया, सोशल मीडिया की टिप्पणियों पर जताई चिंता
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सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर जजों के सरकार समर्थक होने के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने सोशल मीडिया पर जजों व न्यायिक कार्रवाई पर  की जाने वाली टिप्पणियों पर भी चिंता जताई है।

गुरुवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष को टीवी पर सुना कि सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर जज सरकार समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले एक दिन सुप्रीम कोर्ट आएं और देखें कि कितने मामलों में कोर्ट सरकार को घेरकर नागरिकों के लिए लडता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने आगे कहा कि ट्विट के नाम पर हर तरह की टिप्पणियां व अपशब्द कहे जाते हैं। जो भी सुनवाई के दौरान जज बहस करते हैं या टिप्पणी करते हैं , वो सब ट्विटर पर आ जाते हैं।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी बुलंदशहर गैंग रेप मामले में यूपी के पूर्व मंत्री आजम खां की टिप्पणी पर सुनवाई के दौरान की। इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानवेलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच कर रही थी।

इस दौरान एमिक्स क्यूरी हरीश साल्वे ने कहा कि  ट्विटर पर अपशब्दों को देखते हुए उन्होंने ट्विट अकाउंट को डिलीट कर दिया जबकि दूसरे एमिक्स फली नरीमन ने कहा कि वो ट्विटर का इस्तेमाल नहीं करते।

दरअसल जस्टिस जयंत पटेल के इस्तीफा देने से बाद  24X7 के लेफ्ट, राइट एंड सेटर प्रोग्राम में बहस में हिस्सा लेते हुए दुष्यंत दवे  ने ना केवल जस्टिस पटेल के तबादले की निंदा की बल्कि न्यायिक नियुक्तियों के लिए कॉलिजियम को भी निशाना बनाया। उन्होंने कहा था ,” कॉलिजियम हमेशा न्यायपालिका की स्वतंत्रता की गर्जना करता रहता है। उन्होंने न्यायिक नियुक्तियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने के नाम पर कार्यपालिका से छीना है लेकिन आजकल ये ही हो रहा है। जज जो सत्ता के नजदीक हैं, जिन्होंने अमित शाह की मदद की उन्हें ईनाम दिया गया जैसे जस्टिस सदाशिवम और जस्टिस चौहान। ये भारतीय न्यायपालिका में काला दिन है। मुझे चीफ जस्टिस से कोई अपेक्षा नहीं है क्योंकि उन्होंने कालिखो पुल खुदकुशी नोट में गंभीर आरोप लगने पर और सीबीआई जांच लंबित होने पर समझौता कर लिया है। लेकिन कॉलिजियम के चार अन्य सदस्य उत्कृष्ट हैं और पूरी तरह ईमानदार हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं। इसलिए मुझे इस बात का गहरा धक्का लगा है कि ये फैसला लिया गया है।

इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।

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