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सुप्रीम कोर्ट की ई कमेटी के मुखिया बने रहेंगे न्यायमूर्ति एम बी लोकुर

LiveLaw News Network
26 Sep 2017 7:31 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट की ई कमेटी के मुखिया बने रहेंगे न्यायमूर्ति एम बी लोकुर
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न्यायमूर्ति एम बी लोकुर देशभर की अदालतों में डिजीटलाइजेशन का जिम्मा संभालने वाली सुप्रीम कोर्ट की ई कमेटी के मुखिया बने रहेंगे। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने पूर्व मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति जे एस खेहर के फैसले पर भरोसा रखा है।

न्यायमूर्ति लोकुर का ई कमेटी के मुखिया बने रहना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2012 में पहली बार ई कमेटी का मुखिया बनने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को पेपरलेस बनाने का जिम्मा संभाला है।

जुलाई में ही ई कमेटी ने इस दिशा में कदम बढाते हुए पहली पांच कोर्ट में विशाल कंप्यूटर टेबलेट लगाए हैं जिनमें लिखने की व्यवस्था भी है। सुप्रीम कोर्ट के पूरे केस रिकार्ड का डिजीटलाइजेशन अगले साल तक पूरा होने की उम्मीद है।

पीटीआई रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी महीने  में मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा जोकि इस अहम कमेटी के संरक्षक भी हैं, ने न्यायमूर्ति लोकुर को ही कमेटी का प्रभारी जज बने रहने का नोटिफिकेशन जारी किया है। कमेटी में उनके अलावा न्यायमूर्ति ए एम खानवेलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड और चार अन्य लोग हैं। आमंत्रित सदस्यों में अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल, सॉलीसिटर जनरल रंजीत कुमार और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश बीडी अहमद भी शामिल हैं। मुख्य न्यायधीश एच एस कपाडिया ने सबसे पहले 2012 में न्यायमूर्ति लोकुर को ई पैनल का हेड बनाया था जोकि पिछले साल तक पद पर बने रहे। लेकिन नवंबर 2016 में तत्कालीन मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर ने उन्हें हटाकर राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश सुनील अंबवानी को ई कमेटी का मुखिया बना दिया।

लेकिन न्यायमूर्ति खेहर ने मुख्य न्यायधीश बनने के बाद न्यायमूर्ति ठाकुर के फैसले को पलटते हुए न्यायमूर्ति लोकुर को फिर से ये पद सौंप दिया जो लगातार मुख्य न्यायधीश कपाडिया के बाद न्यायमूर्ति अल्तमश कबीर, न्यायमूर्ति पी सदाशिवम, न्यायमूर्ति आर एम लोढा और न्यायमूर्ति एचएल दत्तू के मुख्य न्यायधीश बनने के दौरान भी पद पर रहे। न्यायमूर्ति लोकुर इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता के क्रम में चौथे क्रम पर हैं और 30 दिसंबर 2018 को रिटायर होंगे।

दरअसल ई कमेटी को सरकार ने 2004 में देशभर की अदालतों में सूचना एवं संचार तकनीक को लागू करने की सुप्रीम कोर्ट की पॉलिसी के तहत बनाया था। डिजिटलाइजेशन का काम सबसे पहले न्यायमूर्ति एच एल दत्तू के वक्त शुरु हुआ जब उन्होंने न्यायमूर्ति लोकुर को इसका हेड बनाया। इसी साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने इंटीग्रेटिड केस मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (ICMIS) भी लांच किया जिसके तहत विभिन्न हाईकोर्ट बडी संख्या में अपनी केस फाइलों को वेबसाइट पर लोड कर रहे हैं।

ICMIS को अगली जनरेशन का हाईब्रिड डेटाबेस कहा जा रहा है जिसके तहत मुकदमेबाज और वकील अपने केस का स्टेटस, अगली तारीख और त्रुटि होने पर ऑनलाइन ही जानकारी ले सकते हैं। कमेटी ने निचली अदालतों के लिए नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड को सफलतापूर्वक लांच किया है और अब ये ई कमेटी हाईकोर्ट के लिए ऐसा ही ग्रिड तैयार कर रही है। ये ग्रिड हर राज्य की जिला अदालत में सिविल और आपराधिक दोनों लंबित केसों का डेटा देती है। इसके तहत वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं द्वारा दाखिल केसों के डेटा के अलावा दस साल और पांच साल से ज्यादा लंबित केसों की जानकारी भी दी जाती है।

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