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संदेह के लाभ में रेप केस से बरी पिपली लाइव के सह निर्देशक महमूद फारूकी [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
26 Sep 2017 4:43 AM GMT
संदेह के लाभ में रेप केस से बरी पिपली लाइव के सह निर्देशक महमूद फारूकी  [निर्णय पढ़ें]
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विदेशी छात्रा से रेप का मामले में पिपली लाइव फिल्म के सह-निर्देशक महमूद फारूकी को राहत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने साकेत कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें उन्हें सात साल की सजा सुनाई गई थी।

सोमवार को फारुकी की अपील पर फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने कहा कि  इस मामले में सवाल ये था कि क्या ऐसी कोई घटना  हुई थी या नहीं, अगर हुआ था तो क्या पीडिता की सहमति से हुआ या नहीं। क्या फारूकी पीडिता की बात समझ पाया या नहीं। ऐसे में फारूकी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। निचली अदालत के फैसले को रद्द किया जाता है। अपने 82 पेज के ऑर्डर में हाईकोर्ट ने हां और ना पर भी काफी लिखा है। कोर्ट ने कहा है कि निर्भया केस के बाद कानून में हुए संशोधन में किसी की सहमति में हां और ना का बहुत बडा स्थान हो गया है। इसलिए किसी की ना को हमेशा ही ना नहीं माना जा सकता। कई बार ना में हां भी होता है। शिकायतकर्ता के पुराने रिकार्ड में कुछ इसी तरह की बात सामने आई है। हाईकोर्ट ने फैसले में पहले की घटनाओं का जिक्र किया है जिसमें छात्रा ने फारुकी के साथ पब में और उसके घर जाकर शराब पी और खाना खाया।

इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि छात्रा ने वारदात की सूचना देरी से पुलिस की दी। एफआईआर कराने में काफी देरी की गई। छात्रा का यह तर्क कि वह डर गई थी अमेरिका में परिवार के सपोर्ट से उसे हिम्मत आई और वह फिर उसने भारत आकर शिकायत दी संतोषनजक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस बात का संदेह है कि छात्रा की सहमति थी या नहीं। ऐसे में संदेह के लाभ के आधार पर फारूकी को सभी आरोपों से बरी किया जाता है।

कोर्ट ने कहा कि मानव की मैमोरी हमेशा सही नहीं होती है। हमारी मैमोरी कोई रिकोर्डर नहीं है। यह तो केवल टुकड़ों में पूर्व में हमारे साथ हुई घटनाओं को बताती है। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि छात्रा ने वारदात की सूचना देरी से पुलिस की दी। एफआईआर कराने में काफी देरी की गई। छात्रा का यह तर्क कि वह डर गई थी अमेरिका में परिवार के सपोर्ट से उसे हिम्मत आई और वह फिर उसने भारत आकर शिकायत दी संतोषनजक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस बात का संदेह है कि छात्रा की सहमति थी या नहीं। ऐसे में संदेह के लाभ के आधार पर फारूकी को सभी आरोपों से बरी किया जाता है।

हाईकोर्ट ने ये भी माना कि फारूकी बाईपोलर डिसऑर्डर नामक मानसिक रोग से पीड़ित है। वह यह नहीं समझ पाया कि छात्रा की सहमति थी या नहीं। इस बीमारी से पीड़ित लोग जल्दी से कोई फैसला नहीं ले पाते। वह जल्द गुस्से में आ जाते हैं। इस बीमारी से ग्रसित लोग जरूरी नहीं है कि सामने वाले की बात उस संदर्भ में ही लें जिस संदर्भ में वह कह रहा है।

दरअसल अगस्त 2016 को पिपली लाइव फिल्म के सह-निर्देशक महमूद फारूकी को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 7 साल की सजा सुनाई थी। साथ ही, फारूकी पर कोर्ट ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। फारूकी को कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एक अमेरिकी शोधार्थी के रेप का दोषी पाया गया था।महमूद फारूकी को 30 जुलाई 2016 को साकेत कोर्ट ने अमेरिकी महिला के साथ रेप का दोषी करार दिया था। 35 वर्षीय अमेरिकी महिला ने जून 2015 में फारूकी के खिलाफ न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में रेप का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। अमेरिकी महिला का आरोप था कि फारूकी ने उनके साथ दिल्ली के सुखदेव विहार में रेप किया था। महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह अपने रिसर्च के काम से दिल्ली आई हुई थीं, तब फारूकी ने अपने आवास पर उनके साथ रेप किया। मामला 28 मार्च, 2015 का है। महिला ने कोर्ट को बताया था कि बाद में फारूकी ने ई-मेल्स के जरिए उनसे माफी भी मांगी थी। हालांकि, फारूकी ने इन आरोपों से इनकार किया था। पुलिस ने 29 जून, 2016 को अपनी चार्जशीट फाइल की थी, जिसमें इस बात का जिक्र था कि फारूकी ने अपने सुखदेव विहार स्थित आवास पर अमेरिका महिला के साथ रेप किया था।सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से महमूद फारूकी के लिए ज्यादा से ज्यादा उम्र कैद की मांग की थी। गौरतलब है कि  दिसंबर, 2012 के निर्भया कांड के बाद 2013 में कड़े किए गए रेप कानून के बाद देश में पहली बार जबरन ओरल सेक्स के मामले में फारूकी को दोषी करार दिया गया था। बदले कानून में रेप के कुछ गंभीर मामलों में 10 साल तक की न्यूनतम सज़ा सजा का प्रावधान है।


 
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