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मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों के अस्पताल के लिए नियम तय करने को कहा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
22 Sep 2017 7:52 AM GMT
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों के अस्पताल के लिए नियम तय करने को कहा [आर्डर पढ़े]
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मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा बीएमएचआरसी के लिए रिक्रूटमेंट नियम तय करे |मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से कहा है कि वह रिक्रूटमेंट के लिए नियम तय करे। अदालत ने कहा है कि भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर के लिए टीचिंग और नॉन टीचिंग पद के लिए रिक्रूटमेंट रूल्स तय करें। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक ये काम पूरा किया जाए अन्यथा मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी को तलब किया जाएगा।.

बीएमएचआरसी खासकर भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार के लिए खोला गया था। ये सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है। ये अस्पताल हेल्थ और फैमिली वेलफेयर मिनिस्ट्री के तहत काम कर रहा है।

इस मामले में याचिकाकर्ता एनजी जयप्रकाश ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट के तमाम निर्देश के बावजूद केंद्रीय हेल्थ और फैमिली वेलफेयर मिनिस्ट्री ने अभी तक टीचिंग और नॉन टीचिंग फैकल्टी के लिए रिक्रूटमेंट नियम तय नहीं किए हैं। भोपाल गैस पीड़ितों का  सही तरह से इलाज नहीं हो पा रहा है क्योंकि कई डॉक्टर और अन्य स्टाफ के पद खाली पड़े हैं। जयप्रकाश भोपाल गैस पीडि़त संघर्ष सहयोग समिति के कोऑर्डिनेटर हैं। 2016 में दर्जनों डॉक्टरों ने बीएमएचआरसी में अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि वह भविष्य में बिना सर्विस कंडिशन औऱ नियम के अपनी सेवा नहीं दे पाएंगे।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता औऱ जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बेंच ने कहा कि अगर अगली सुनवाई से पहले टीचरों और नॉन टीचरों की भर्ती के लिए रिक्रूटमेंट नियम तय नहीं हुए तो वह मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी को बुलाएंगे। उन्हें कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। हाई कोर्ट ने इस मामले में कई अर्जियों पर सुनवाई के दौरान आदेश पारित किए हैं। याचिकाओं में मेडिकल फैसिलिटी पर सवाल उठाया गया है अस्पताल में भोपाल गैस पीड़ितों का इलाज होता है।


 
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