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लॉ से संंबंधित उच्चतर शिक्षा वास्तविक प्रैक्टिस माना जाएगाः जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
20 Sep 2017 10:54 AM GMT
लॉ से संंबंधित उच्चतर शिक्षा वास्तविक प्रैक्टिस माना जाएगाः जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
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जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर लॉ ग्रेजुएट लॉ से संबंधित उच्चतर शिक्षा ग्रहण करता है तो उसे वास्तविक प्रैक्टिस का पार्ट माना जाएगा।

जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर की बेंच ने कहा है कि लॉ ग्रेजुएट अगर बार काउंसिल से पंजीकृत है और वह एलएलबी और एलएलडी कर रहा हो तो उसे असल प्रैक्टिस का हिस्सा माना जाएगा इस दौरान किए गए ड्राफ्ट और सलाह भी प्रैक्टिस का पार्ट होगा। इस मामले में राज्य कानून विभाग में लीगल असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदनोमें लॉ स्टूडेंट ने इसी आधार पर आवेदन दिया था लेकिन इसे ताहीर अहमद डार ने चुनौती दी थी और दो साल के वास्तविक प्रैक्टिस के समय में से एलएलएम व एलएलडी की अवधि को हटा दिया था और उसे वास्तविक प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं माना था। डार की दलील थी कि जो समय आवेदक ने एलएलएम या फिर एलएलडी के लिए दिया है वह वास्तविक प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं है।

जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने कहा कि वास्तविक प्रैक्टिस और स्टैडिंग प्रैक्टिस का जहां तक सवाल है तो ये दोनों नौकरी के लिए अनुभव के मामले में एक ही है। कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश पारित किए हैं।




  1. बार में वास्तविक प्रैक्टिस सर्टिफिकेट या फिर स्टैंडिंग प्रैक्टिस से संबंधित सर्टिफिकेट जो हाई कोर्ट जारी करता है वह कड़ाई से लागू किया जाए।

  2.  लॉ ग्रेजुएट जो बार काउंसिल से पंजीकृत है और इस दौरान एलएलएम या एलएलडी कर रहा हो, ड्राफ्टिंग और सलाह देता हो तो उसे वास्तविक प्रैक्टिस या स्टैंडिंग प्रैक्टिस के तौर पर समझा जाएष।

  3.   सिर्फ कोर्ट में पेश होना ही वास्तविक प्रैक्टिस नहीं है। सिर्फ उसी आधार पर सर्टिफिकेट जारी करना क्राइटेरिया नहीं हो सकता।

  4.  अगर किसी ने लॉ किया है और पंजीकरण के बाद सरकारी नौकरी या फिर अन्य काम कर रहा हो और बार से संबंधित न हो तो वह वास्तविक प्रैक्टिस नहीं माना जाएगा। अदालत ने आदेश की कॉपी जिला जज व सेशन जज को भेजने का निर्देश दिया है।


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