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सुप्रीम कोर्ट ने भ्रम के बीमारी से पीडित को डिसेबलिटी पेंशन के खिलाफ केंद्र की अर्जी खारिज़ की

LiveLaw News Network
20 Sep 2017 4:23 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रम के बीमारी से पीडित को डिसेबलिटी पेंशन के खिलाफ केंद्र की अर्जी खारिज़ की
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 2010 के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने भ्रम होने की बीमारी से पीडित व्यक्ति मंजीत सिंह को डिसेबलिटी पेंशन देने के आदेश दिए थे।

जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एल नारायण राव की बेंच ने 15 सितंबर को ये आदेश सुनाया। दरअसल मंजीत सिंह को इस बीमारी के लिए डिसेबलिटी पेंशन देने के लिए इस आधार पर इंकार किया गया कि सेना सर्विस के कारण उनकी मानसिक हालत नहीं बिगडी।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सिंगल जज ने पहले निष्कर्ष निकाला था कि मंजीत सिंह की मानसिक हालत 1997 में सेना में भर्ती होने के तीन साल बाद बिगडी।

जज ने पाया कि सेना में बहुत ज्यादा दबाव रहता है चाहे वो युद्ध ते वक्त हो या कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए या फिर प्राकृतिक आपदा के बात राहत कार्यो के दौरान। क्योंकि मंजीत सिंह को ये बीमारी सेना में भर्ती होने से पहले नहीं थी इसलिए वो डिसेबलिटी पेंशन पाने का हकदार है।

बाद में बडी बेंच ने भी केंद्र सरकार की अपील को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि 18 अगस्त 2010 को दिए सिंगल जज के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार कोई भी ठोस दलील नहीं दे पाई और ना ही इस संबंध में एेसा कानून बता पाई जो जज के फैसले के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार की अपील को देरी के आधार पर खारिज कर दिया क्योंकि ये अपील हाईकोर्ट की बडी बेंच के फैसले की तारीख के सात साल बाद दाखिल की गई थी।

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