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अब सीबीआई कोर्ट में शुरु हुई दो हत्याओं पर अंतिम जिरह, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ गुरमीत राम रहीम

LiveLaw News Network
16 Sep 2017 8:52 AM GMT
अब सीबीआई कोर्ट में शुरु हुई दो हत्याओं पर अंतिम जिरह, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ गुरमीत राम रहीम
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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ हत्या के 2 मामलों में शनिवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट में सुनवाई हुई। वहीं छत्रपति और रणजीत सिंह हत्या मामले में गवाह खट्टा सिंह की अर्जी दाखिल की गई है। पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह का कहना है कि वह इन दोनों मामलो में दोबारा से गवाही दर्ज करवाना चाहता है। इस याचिका पर कोर्ट ने 22 सितंबर तक के लिए नोटिस जारी कर दिया है। जिस पर कोर्ट फैसला लेगी कि क्या खट्टा सिंह के दोबारा बयान दर्ज हो सकते हैं या नहीं।

सीबीआई के गवाह रहे खट्टा सिंह का कहना है कि पहले उसपर दबाव था जिसके चलते वह अपने बयानों से मुकर गया था लेकिन अब वह दोबारा से अपने बयान दर्ज करवाना चाहता है । गौरतलब है कि पहले खट्टा सिंह अपने बयानों से कोर्ट में पलट गया था।

वहीं किसी भी प्रकार के उपद्रव से बचने के लिए पूरे इलाके में पहले ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पंचकूला में अर्धसैनिक बलों और हरियाणा पुलिस की टुकड़ियों को तैनात किया गया था।

इस सुनवाई के दौरान राम रहीम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रोहतक की सुनारिया जेल से सीबीआई के विशेष जज जगदीप सिंह की कोर्ट में पेश किया गया। दोनों हत्या मामलों के बाकी सभी 7 आरोपी भी सीबीआई कोर्ट में पेश किए गए। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या आरोप में निर्मल सिंह, कृष्ण लाल और कुलदीप जबकि डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या आरोप में कृष्ण लाल, अवतार सिंह, जसबीर, सबदिल और इन्द्रसेन को पेश किया गया। दोनों मामलों में गुरमीत राम रहीम मुख्य आरोपी है।

 राम रहीम बलात्कार के दो मामलों में 20 वर्ष कैद की सजा भुगत रहा है। सीबीआई की अदालत पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या मामले की सुनवाई कर रही है। इन मामलों में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद से मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकती है।

दरअसल साध्वियों से बलात्कार के 2 मामलों में सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 अगस्त को राम रहीम को 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद पंचकूला और हरियाणा के कई इलाकों में काफी हिंसा हुई थी। गौरतलब है कि 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक 'पूरा सच' के संपादक रामचन्द्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोलियों से छलनी कर दिया गया था। 21 नवम्बर 2002 को छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी। उनके अखबार 'पूरा सच' ने एक गुमनाम पत्र छापा था। पत्र में बताया गया था कि सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में साध्वियों का यौन उत्पीड़न होता था।

दूसरा मामला 10 जुलाई 2002 का है जब डेरा प्रबंध समिति सदस्य रहे रणजीत सिंह की हत्या की गई थी। डेरा प्रबंधन को रंजीत सिंह पर साध्वी का पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का शक था। हत्या का शिकार बने दोनों लोगों के परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नवंबर 2003 में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
हत्या मामले में सीबीआई ने 30 जुलाई 2007 को आरोप पत्र दाखिल किया था।

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