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SC ने पूछा, रैनबसेरों पर राज्यों को दिए फंड का कैसे लिया जाए हिसाब- किताब, कौन करे निगरानी?

LiveLaw News Network
13 Sep 2017 11:26 AM GMT
SC ने पूछा, रैनबसेरों पर राज्यों को दिए फंड का कैसे लिया जाए हिसाब- किताब, कौन करे निगरानी?
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि राष्ट्रीय नगरीय जीविका मिशन के तहत राज्यों को दिए पैसों का ऑडिट कैसे किया जाए ? क्या CAG से ऑडिट कराया जा सकता है ?  इन रैनबसेरों की निगरानी कैसे की जाए ? देशभर के शहरों में रहने वाले बेघर लोगों के लिए रैनबसेरों के इंतजाम को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल पूछे हैं।

गौरतलब है राष्ट्रीय नगरीय जीविका मिशन के तहत केंद्र सरकार की कई योजनाएं हैं। उनमें ही शहर में रहने वाले बेघर लोगों के लिए रैनबसेरों के इंतजाम करना भी है।

बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता ने केंद्र सरकार को कहा कि राष्ट्रीय नगरीय जीविका मिशन के तहत फंड जो राज्य सरकारों को दिया गया है, उसका ऑडिट होना जरूरी है। ऑडिट का काम केंद्र सरकार को करना है। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या इसका ऑडिट CAG से कराया जा सकता है ?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा इस योजना के तहत 790 शहर आते है तो ऐसे में 790 शहरों में रैनबसेरों की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे में दो विकल्प हैं कि एक तो ये कि हर हाईकोर्ट को ये जिम्मेदारी दे दी जाए कि वो उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले शहरों में इस योजना की निगरानी करे। जैसे उत्तर प्रदेश के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को निगरानी करने को कहा जाए। दूसरा विकल्प ये है कि इस पूरे योजना की सुप्रीम कोर्ट खुद निगरानी करे।

इस बात पर केंद्र सरकार का कहना था कु पहला विकल्प बेहतर है क्योंकि 790 शहरों की  निगरानी  करना सुप्रीम कोर्ट के लिए आसान नही होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार 13 अक्तूबर तक कोर्ट को बताए कि राष्ट्रीय नगरीय जीविका मिशन के तहत राज्यों को दिए पैसों का ऑडिट और इसकी निगरानी कैसे की जाए।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट देशभर में बेघर लोगों के लिए रैनबसेरों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इससे पहले भी कोर्ट इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को दिशा निर्देश जारी कर चुका है।

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