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बहुत सारे सांसद श्रेष्ठ हैं और पूरे राजनीतिक वर्ग को काली ब्रश से रंगा नहीं जा सकता, AG ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

LiveLaw News Network
12 Sep 2017 2:44 PM GMT
बहुत सारे सांसद श्रेष्ठ हैं और पूरे राजनीतिक वर्ग को काली ब्रश से रंगा नहीं जा सकता, AG ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
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देश के अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बहुत सारे सांसद श्रेष्ठ हैं और पूरे राजनीतिक वर्ग को काली ब्रश से रंगा नहीं जा सकता।

AG वेणुगोपाल ने जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच के सामने कहा कि ये मानना सही नहीं होगा कि पूरा राजनीतिक वर्ग आदतन भ्रष्ट है। दरअसल AG NGO लोकप्रहरी की ओर से याचिकाकर्ता एस एन शुक्ला की दलील पर बोल रहे थे जिसमें कहा गया कि भारत में अब राजनीति सबसे चकाचौंध वाला पेशा है और राजनेताओं में करोडपति बढते जा रहे हैं।

एक ओर शुक्ला राजनेताओं से जुडे भ्रष्टाचार के आरोपों से निपटने के लिए स्थायी संस्थानिक मैकेनिज्म की मांग कर रहे थे तो दूसरी ओर AG इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि ये मान लेना सही नहीं होगा कि CBDT एेसी शिकायतों पर सही से जांच नहीं कर रही और प्रभावी तरीके से जिम्मेदारी नहीं निभा रही।

जब जस्टिस चेलामेश्वर ने  संस्थानिक मैकेनिज्म पर सवाल किया तो वेणुगोपाल ने कोर्ट में किसानों की खुदकुशी और जेल रिफॉर्म के मामलों का हवाला दिया जिसमें सरकार ने भरोसा दिलाया था कि वो कदम उठा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को और वक्त दिया जाना चाहिए ताकि वो योजना पर काम कर सके।

AG ने कहा कि हर शिकायत को ये नहीं मानना चाहिए कि ये भ्रष्टाचार का केस है। जैसे कोई डॉक्टर कैश में फीस लेता है तो क्या ये कहा जा सकता कि ये भ्रष्टाचार है। इस पर जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि ये उदाहरण वकीलों का भी हो सकता है। इस पर AG ने हल्के फुल्के मिजाज में कहा कि उन्होंने सावधान रहते हुए ये कहा है।

मंगलवार की सुनवाई में जस्टिस चेलामेश्वर और वेणुगोपाल के बीच कई दिलचस्प सवाल जवाब हुए। AG ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट फैसला दे चुका है कि निजता एक मौलिक अधिकार है एेसे में याचिकाकर्ता की मांग के आधार पर किसी प्रत्याशी, उसकी पत्नी या परिवार वालों के आय के स्त्रोत को साझा नहीं किया जा सकता।

वहीं जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा लेकिन इस अधिकार को जानकारी प्राप्त करने के अधिकार के बराबर रखना होगा क्योंकि वो भी अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत मौलिक अधिकार है। AG ने जवाब में कहा कि इसी बराबरी के तहत वो निजता को लेकर नौ जजों की बेंच के सामने दलील दे रहे थे कि गरीब और लाचार लोगों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आधार को अनिवार्य बनाया जा रहा है।

जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि जब जरूरत और अधिकार के बीच की बात हो तो सामान्य मामलों में इसकी पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि निजता भी संपूर्ण अधिकार नहीं है।

इसके बाद बहस सूचना के अधिकार से सेक्शन 24 पर हुई जिसमें खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को छूट दी गई है। केंद्र ने इसमें संशोधन कर आयकर विभाग के डीजी ( इंवेस्टिगेशन) और सीबीआई को भी शामिल कर लिया है। जस्टिस चेलामेश्वर ने पूछा कि ये संशोधन क्या सूचना के अधिकार के उद्देश्य के तहत सही ठहरता है। लेकिन AG ने कहा कि इस पर इस याचिका के तहत सुनवाई नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता चाहे तो इस मामले में अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

जस्टिस चेलामेश्वर ने पूछा कि क्या CrPC के प्रावधानों के तहत एेसे मामलों की जांच और गोपनीयता को सरंक्षण नहीं दिया जा सकता ? वहीं शुक्ला ने कहा कि इस मामले में कोर्ट सही दखल दे रहा है क्योंकि अब तक चुनाव सुधारों को लेकर जितने भी कदम उठाए गए हैं वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाए गए हैं। राजनीतिक वर्ग अपराधीकरण हटाने के लिए सिर्फ होंठ हिलाने के अलावा कुछ नहीं कर रहा है। शुक्ला ने एेसे कई उदाहरण दिए जो संसद में प्रस्ताव आए और धूल चाट रहे हैं। शुक्ला ने कहा कि यदि उनकी अर्जी वाजिब हो तो उन्हें कॉस्ट दिलाई जाए। लोकप्रहरी में 12पूर्व नौकरशाह मिलकर राजनीति को साफ करने की लडाई लड रहे हैं और वो अपनी पेंशन से खर्च करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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