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फर्जीवाडा कर लॉ डिग्री ली, कोर्ट ने सुनाई धारा 420 के तहत तीन साल की सजा

LiveLaw News Network
10 Sep 2017 5:30 AM GMT
फर्जीवाडा कर लॉ डिग्री ली, कोर्ट ने सुनाई धारा 420 के तहत तीन साल की सजा
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एक अनोखे केस में पंजाब के फिरोजपुर की एक अदालत ने फर्जीवाडा कर कानून की डिग्री हासिल कर वकालत का लाइसेंस लेने के मामले में एक शख्स को दोषी करार दिया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अरूण गुप्ता ने 21 साल पहले यानी 1996 को दोषी को धारा 420 के तहत तीन साल की सजा भी सुनाई है।

दरअसल प्रदीप शर्मा ने शिकायत दी थी कि अनूप कुमार को 16 मई 1985 को होमगार्ड नियुक्त किया गया था और वो चार मार्च 1996 तक होमगार्ड बना रहा। ड्यूटी से नदारद रहने की वजह से उसे हटा दिया गया। आरोप लगाया गया कि इस दौरान उसने लखनऊ विश्विद्यालय से तीन साल की लॉ डिग्री ली। इसके लिए 75 फीसदी उपस्थिति जरूरी है लेकिन उसने फर्जीवाडा कर डिग्री हासिल कर ली। ये भी आरोप लगाया गया कि उसने पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल में खुद को पंजीकृत कराया और फिरोजपुर जिला कोर्ट में वकालत करने लगा। यहां तक कि वो फिरोजपुर का नोटरी पब्लिक भी बन गया।

वहीं अनूप ने इस मामले में दोष स्वीकार नहीं किया और दलील दी कि शिकायतकर्ता उसके भाई की पत्नी का रिश्तेदार है और उसने शिकायत इसलिए की है क्योंकि वो उसका एक सिविल केस हार गया था। अनूप के वकील ने शिकायतकर्ता के लोकस पर भी सवाल उठाया।

लेकिन जज अरूण गुप्ता ने ये दलील खारिज कर दी और कहा कि ये मामला जनहित से जुडा है कि कैसे लोग फर्जीवाडा कर डिग्री हासिल करते हैं। कोर्ट ने माना कि वो होमगार्ड के तौर पर फिरोजपुर में तैनात था जिसके लिए उसे भत्ता भी मिलता रहा और इस दौरान उसने एलएलबी के लेक्चर में हिस्सा नहीं लिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपी को ये साबित करना चाहिए था कि वो कालेज की कक्षाओं में हिस्सा लेता रहा है लेकिन उसने ये सबूत नहीं दिए। दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ये साबित करने में कामयाब रहा कि उस वक्त के दौरान आरोपी होमगार्ड के तौर पर फिरोजपुर में ही तैनात रहा। इसलिए किसी भी सबूत की गैरमौजूदगी में ये नहीं माना जा सकता कि आरोपी ने सही तरीके से डिग्री हासिल की।

कोर्ट ने कहा कि ये साबित हो गया है कि आरोपी का उद्देश्य फर्जीवाडा कर पैसा कमाना था और उसने शुरु से ही संस्थान को गलत तरीके से बडा नुकसान पहुंचाया। आरोपी ने कभी भी लेक्चर में हिस्सा नहीं लिया और उसने गैरमौजूद रहते हुए लॉ डिग्री हासिल की। आरोपी ने कभी ये भी खुलासा नहीं किया कि इस दौरान वो हर वक्त फिरोजपुर में ही मौजूद रहा। एेसे में जानबूझकर बेईमानी के जरिए तथ्यों को छिपाकर संस्थान से  लॉ डिग्री हासिल करना फर्जीवाडा और कपट है। इसलिए उसे IPC की धारा 420 के तहत दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई जाती है और दो हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता है।


 
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