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कस्टडी मामलों में बच्चे की भलाई को प्रमुखता मिले : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
7 Sep 2017 9:12 AM GMT
कस्टडी मामलों में बच्चे की भलाई को प्रमुखता मिले : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बच्चों की कस्टडी किसे दी जाए, इसके लिए बच्चे की भलाई को प्रमुखता देते हुए फैसला दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पढाई में बेहतर प्रदर्शन करने पर दो बच्चों की कस्टडी मां को सौंपी है।

सुप्रीम कोर्ट में महिला ने याचिका दाखिल की थी क्योंकि हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों की कस्टडी पिता को दे दी थी। 15 साल के वैवाहिक जीवन के बाद महिला ने क्रूरता और उत्पीडन के आरोप लगाकर पति को छोड दिया था। महिला ने कहा कि वो अपने बच्चों के लिए और आर्थिक सहारे की वजह से इस उत्पीडन और पीडा को सह रही थी। लेकिन जब हालात बेकाबू हो गए तो उसने पति का घर छोड दिया। साथ ही उसने घरेलू हिंसा के तहत केस दर्ज कराया और बच्चों की कस्टडी के लिए अर्जी भी दाखिल की।

निचली अदालत ने फैसला दिया कि बच्चे अपनी मां के साथ रहेंगे जबकि हाईकोर्ट ने पति की याचिका पर बच्चों की कस्टडी उस सौंप दी और निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने इस पर ज्यादा गौर किया कि महिला ने हफ्ते के अंत पर बच्चों को पति को सौंपे जाने के निचली अदालत के फैसले पर अमल नहीं किया। हाईकोर्ट ने पाया कि बिना कोर्ट के आदेश के ही याचिका पर सुनवाई के वक्त ही पति ने बडे बच्चे को मां को दे दिया था।

लेकिन महिला का कहना था कि उसके पति ने बडे बच्चे की कस्टडी किसी मानवता के आधार पर नहीं बल्कि इसलिए दी थी कि उसने 9 वीं कक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था और दसवीं कक्षा में बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए बच्चे को ट्यूशन के अलावा मां के मार्गदर्शन की जरूरत थी।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर सहमति नहीं जताई। कोर्ट ने पाया कि भले ही पति ने दोनों बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में भर्ती कराया था लेकिन दोनों पढाई में सही नहीं थे। लेकिन जब बच्चों को मां को दिया गया तो उनका परिणाम सुधरा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  पिता अपने व्यवसाय में व्यस्त रहने के कारण बच्चों की ओर ध्यान नहीं दे पाए। सुप्रीम कोर्ट ने 17 साल और 13 साल के दोनों बच्चों को भी बुलाया। हालांकि दोनों ने पिता के बारे में कुछ बुरा नहीं कहा लेकिन किसी एक को चुने जाने की बात पर मां के साथ रहने की इच्छा जताई।

मां की दलील को मंजूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट को बच्चे की कस्टडी पर फैसला देने से पहले ये देखना चाहिए कि बच्चे की भलाई किसके पास रहने में है। कोर्ट ने दोनों बच्चों की कस्टडी मां को सौंप दी।


 
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