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डूसू चुनाव में प्रॉपर्टी खराब करने के मामले में हाई कोर्ट ने मांगे रिपोर्ट

LiveLaw News Network
7 Sep 2017 5:47 AM GMT
डूसू चुनाव में प्रॉपर्टी खराब करने के मामले में हाई कोर्ट ने मांगे रिपोर्ट
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दिल्ली यूनिवर्सिटी में चारों तरफ पोस्ट और बैनर से पटा पड़ा है। तमाम कैंडिडेंट्स जो चुनाव लड़ रहे हैं उनके पैम्फ्लेट्स से दीवारें पटी पड़ी है। न सिर्फ दिल्ली यूनिविर्सिटी बल्कि कैंपस के अलावा फ्लाइओवर, अंडर ब्रिज, पीलर्स और मेट्रो स्टेशनों पर भी बैनर, पोस्टर और पेंट किए गए हैं और चारों तरफ चुनाव प्रचार दिख रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट के साथ-साथ नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले में आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि डीसू चुनाव में किस तरह से पब्लिक प्रॉपर्टी को खराब किया गया है और इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में किस तरह से कैंडिडेंट के सपोटर्स ने पोस्टर और पेपर को बर्बाद किया है और दीवारों को खराब किया है इसकी बानगी देखने को मिल रही है। इस मामले में प्रशांत मनचंदा नामक एडवोकेट ने पीआईएल दाखिल कर पब्लिक प्रॉपर्टी को खराब करने का आरोप लगाया है। दिल्ली हाई कोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले में डीयू के वीसी, नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, साउथ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।

एनजीटी ने इस मामले में इस मामले में कंटेप्ट नोटिस जारी किया है। डीयू के लॉ स्टूडेंट्स नितिन चंद्रन ने इस मामले में अर्जी दाखिल कर मामले को एनजीटी के सामने उठाया है। साथ ही डूसू चुनाव में पेपर की बर्बादी का मुद्दा भी उठाया है।

हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल करने वाले मनचंदा ने कहा कि जिनके फेवर में पोस्टर और बैनर का इस्तेमाल किया गया है उससे साबित होता है कि किस कदर पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया गया है। ऐसे अवैध कंडक्ट के लिए क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का कहना है कि डीयू के क्लासरूम में, उसके कॉलेजों के दीवारों पर पेंट और पोस्टर के जरिये प्रचार किया गया है और कैंडिडेट के लिए वोट मांगा गया है। ऐसे में प्रतिवादियों को कहा जाता है कि वह  इलाके में इंस्पेक्शन करें और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करें। इसके लिए अदालत ने एक हफ्ते का वक्त दिया है।

अदालत ने कहा कि प्रतिवादी इस बात को सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होगा और पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। मनचंदा ने कोर्ट को बतााया कि लिंगदोह कमिटी के सिफारिशों का घोर उल्लंघन किया गया है। कोई कैडिडेंट और उसके समर्थक किसी भी पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। सभी कैंडिडेंट नुकासन के लिए जिम्मेदार होंगे। साथ ही कहा गया है कि हाई कोर्ट के डबल बेंच ने अनिल भाटिया बनाम दिल्ली सरकार के वाद में कहा था कि यहां तक कि प्राइवेट प्रॉपर्टी में भी दीवार को गंदा नहीं किया जा सकता उसमें पेटिंग नहीं की जा सकती है ये लोगोे के जीवन के अधिकार में दखल होगा।

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