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बाल विवाह पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ये मैरिज नही "मिराज " है

LiveLaw News Network
5 Sep 2017 1:26 PM GMT
बाल विवाह पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ये मैरिज नही मिराज  है
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बाल विवाह के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि कानून में बाल विवाह को अपराध माना गया है उसके बावजूद लोग बाल विवाह करते है। कोर्ट ने कहा कि ये शादी नही बल्कि मिराज यानी मृगतृष्णा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके तीन विकल्प हैं। या इस अपवाद को हटा दे जिसका मतलब है कि बाल विवाह के मामले में 15 से 18 साल की लड़की के साथ अगर उसका पति संबंध बनाता है तो उसे रेप माना जाए।

दूसरा विकल्प ये है कि इस मामले में पॉक्सो एक्ट लागू किया जाए यानि बाल विवाह के मामले में 15 से 18 साल की लड़की के साथ अगर उसका पति संबंध बनाता है तो उसपर पॉस्को के तहत कारवाई हो। तीसरा विकल्प ये है कि इसमें कुछ न किया जाए और इसे अपवाद माना जाए जिसका मतलब ये है कि बाल विवाह के मामले में 15 से 18 साल की लड़की के साथ अगर उसका पति संबंध बनाता तो वो रेप नही माना जायेगा।

वही याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई कि बाल विवाह से बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। बाल विवाह बच्चों पर एक तरह का जुर्म है क्योंकि कम उम्र में शादी करने से उनका यौन उत्पीड़न ज्यादा होता है। ऐसे में बच्चों को सरंक्षण करने की जरूरत है।

वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश राणा मुखर्जी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बाल विवाह सामाजिक सच्चाई है और इस पर कानून बनाना संसद का काम है। कोर्ट को इसमें दखल नही देना चाहिए। इस दौरान बाल विवाह में केवल 15 दिन से 2 साल की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल भी  उठाए। सुप्रीम ने केंद्र से कहा क्या ये कठोर सज़ा है ? कोर्ट ने कहा ये कुछ नही है। दरअसल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि बाल विवाह करने पर कठोर सजा का प्रावधान है। ये सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

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