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लंबे वक्त से हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई ना होने पर क्या मिल सकती है जमानत, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

LiveLaw News Network
4 Sep 2017 9:40 AM GMT
लंबे वक्त से हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई ना होने पर क्या मिल सकती है जमानत, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
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एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ज़मानत आजादी का मूल आश्वासन है। केसों का लंबित होना परेशानी पैदा करता है। इस समस्या का कुछ निवारण ढूढ़ना होगा। अब सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि हाई कोर्ट में लंबे समय से लंबित मामले जमानत का आधार हो सकता है या नही।


सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से हाई कोर्ट में लंबित आपराधिक मामलों की लंबित अपीलों का आंकडा मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से पूछा है कुल लंबित मामलों में से कितने मामले हैं जिनमें उम्रक़ैद की सज़ा हुई है। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को 6 हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट में ये डेटा दाखिल करना है।

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चेलामेश्वर ने लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि ये एक गंभीर मामला है। ज़मानत आजादी का मूल आश्वासन है। केसों का लंबित होना कोर्ट को परेशान करता है। इस समस्या का कुछ हल निकालना जरूरी है।
दरअसल लॉयर्सफ़ॉर जस्टिस नामक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट की इंदौर बेंच की तीन जजों की पीठ के 26-4-2017 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर मामला हाई कोर्ट में भले ही लंबे समय से लंबित है और कोई व्यक्ति तो 11-12 साल सजा काट चुका है तो भी ये सजा को निलंबित करने का आधार नही हो सकता।

याचिकाकर्ता की ओर सुप्रीम कोर्ट में कहा गया हकि 1998 और 2000 की कई ऐसी अपील हैं जो अभी भी लंबित हैं और खासतौर से उम्रकैद की सजा काट रहे लोगों की अपील पर फिलहाल सुनवाई के आसार नहीं हैं। इस पर जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि जब वो आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट आए थे तो सिर्फ दो साल की पेंडेंसी चल रही थी।

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