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सरकारी वकील की ईमानदारी पर आधारहीन आरोप लगाए, हाईकोर्ट ने सुनवाई हफ्तेभर की सजा [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
3 Sep 2017 3:57 PM GMT
सरकारी वकील की ईमानदारी पर आधारहीन आरोप लगाए, हाईकोर्ट ने सुनवाई हफ्तेभर की सजा [निर्णय पढ़ें]
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दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में राजस्व विभाग के सरकारी वकील के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाने का दोषी मानते हुए एक पक्षकार को एक हफ्ते की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने कहा है कि प्रतिवादी राकेश कुमार गुप्ता इस मामले में अदालत की अवमानना का दोषी है क्योंकि उसने कोर्ट की मदद कर रहे सरकारी वकील पर आधारहीन आरोप लगाए। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस नज्मी वजीरी ने राकेश पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस सजा को 60 दिन के लिए निलंबित कर दिया है ताकि वो इस फैसले के खिलाफ अपील कर सके।

दरअसल हाईकोर्ट ने राकेश कुमार गुप्ता की कारवाई पर संज्ञान लिया था क्योंकि उसने राजस्व विभाग की ओर से पेश वकीलों के खिलाफ ईमानदारी पर गंभीर आरोप लगाए थे।  कोर्ट ने कहा कि ये वकील कोर्ट के अफसर हैं और न्याय प्रशासन में कोर्ट की मदद कर रहे हैं।  कोर्ट ने कहा कि दोषी का ये रवैया न्याय प्रक्रिया का अपमान और इसकी वजह से कोर्ट का वक्त खराब हुआ है क्योंकि इन आरोपों को वो बार बार वापस लेते हुए बिना शर्त माफी मांगता है। ये सीधे तौर पर अदालत की अवमानना के दायरे में आता है।

कोर्ट ने ये भी गौर किया कि गुप्ता ने सिर्फ ये आरोप ही नहीं लगाए बल्कि चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट के पाय वकील के खिलाफ केस दर्ज करने की अर्जी भी लगाई। लेकिन 30 महीने बीत जाने के बावजूद उसने ना तो इस केस को साबित करने की कोशिश की और ना ही केस वापस लेने की बात पर अमल किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह पेशेगत ईमानदारी पर आरोप लगाने से वकील कोर्ट और अपने मुवक्किलों की पूरी तरह मदद करने से झिझकेंगे। इतना ही नहीं ये वकीलों के लिए अपने परिवार, दोस्तों, समाज और कानूनी बिरादरी में शर्मिंदगी वाली बात है क्योंकि दो वकील पहले भी इस केस से हट चुके हैं।

हाईकोर्ट ने गुप्ता की राहत की मांग वाली सारी याचिकाओं को खारिज करते प्रति अर्जी 2500 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें अपने पक्ष में 10 करोड का अंतरिम अवार्ड मांगने वाली याचिका की सुनवाई की कोर्ट प्रक्रिया की फोन पर रिकार्डिंग भी शामिल है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि गुप्ता को लगा होगा कि जिस तरह अपनी जान खतरे में डालकर उसने न्यायिक प्रशासन से भ्रष्टाचार हटाने की कोशिश की है, उससे हाईकोर्ट उसके लिए भारत रत्न देने की सिफारिश करेगा।

कोर्ट ने कहा कि जिस तरह 23-9-2008 को उसकी याचिका खारिज होने के बाद वो सरकारी वकील पर आरोप लगाता रहा। कोर्ट को भी सीधे ईमेल भेजता रहा। यहां तक कि हलफनामे भी दाखिल करता रहा और दूसरी ओर इन आरोपों को वापस लेने की बात भी करता रहा, इससे साफ है कि ये आपराधिक अवमानना का मामला बनता है।


 
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