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डीटीसी को झटका, आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने टाटा मोटर्स को 326 करोड का नुकसान भरने को कहा

LiveLaw News Network
18 Aug 2017 5:12 AM GMT
डीटीसी को झटका, आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने टाटा मोटर्स को 326 करोड का नुकसान भरने को कहा
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मध्यस्थ न्यायधिकरण यानी आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाते हुए डीटीसी के टाटा मोटर्स को करीब 326 का नुकसान भरने को कहा है। दोनों के बीच ये विवाद 2010 में हुए कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान बसों की डिलीवरी को लेकर हुआ था।

जस्टिस एपी शाह और जस्टिस आरसी चोपडा ने बहुमत ये ये फैसला TML के पक्ष में दिया जबकि जस्टिस रेखा शर्मा ने फैसले में कहा कि    TML को कोई राहत नहीं दी जा सकती।

बहुमत से आए इस फैसले में ट्रिब्यनल ने डीटीसी के दावे को भी खारिज कर दिया और कहा कि डीटीसी के पांच जनवरी 2013 को जारी किए गए नोटिस अवैद्य हैं जिनमें 14,06,57,183 और  21, 75, 38,172 का जुर्माना लगाया गया था।

दरअसल डीटीसी ने जनवरी 2008 में 2500 लो फ्लोर CNG बसों का टेंडर जारी किया था। इनमें से 1625 बसों का टेंडर TML को दिया गया। इनमे 650 एसी औप 975 बिना एसी बसें शामिल थीं। एसी बसों की डिलीवरी 11 महीने में की जानी थी जबकि बिना एसी बसों को नौ महीने में दिया जाना था। ये समय सीमा 6 महीने के भीतर LOA के साइन होने पर प्रोटोटाइप की मंजूरी के बाद शुरु होनी थी।

क्रांजावाला एंड कंपनी से वरिष्ठ वकील गोपाल जैन, मीरा माथुर ओर नंदिनी गोरे ने TML की ओर से ट्रिब्यूनल को बताया कि कंपनी की ओर से बार बार डीटीसी को ये बताया गया कि उसके द्वारा तय किए गए मानक व्यवहारिक और तकनीकी रूप से मुश्किल हैं और इस बारे में स्टैंडर्ड मानक तय किए जाने चाहिए। लेकिन डीटीसी ने इस सुझाव पर ध्यान नहीं दिया जिसकी वजह से करार पर असर पडा।

TML की ओर से ये भी कहा गया कि डीटीसी ने विशेषताओं और अप्रूवल और टेस्टिंग मैथडोलाजी को कई बार में जाकर तय किया जिसकी वजह से प्रोटोटाइप के विकास, मेटेरियल की खरीद और टेस्टिंग पर असर पडा जो सीधे सीधे डिलीवरी के शेड्यूल समय से जुडे थे।

ये भी कहा गया कि उसने सारी बसों को 31 मार्च 2010 को दे दिया था लेकिन डीटीसी मे सप्लाई में देरी के लिए हर्जाना लगा दिया।

वहीं डीटीसी का कहना था कि TML ने स्पेयर पार्टस, कैटालॉग और मूल्य को तय करने को लेकर देरी की और बसों की मरम्मत में वक्त लगा रही थी।

हालांकि इस दौरान ट्रिब्यूनल ने TML के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एक्सीडेंट बिल के तौर पर गलत कटौती की गई है। उसके बिजनेस घाटे के तौर पर 50 करोड और डीटीसी के सूची बनाने व मैनपावर में देरी के चलते 8.58 करोड के दावे को खारिज कर दिया।

वहीं अल्पमत के फैसले में जस्टिस रेखा शर्मा ने कहा ति TML राहत पाने का हकदार नहीं है। उन्होंने कहा कि डीटीसी TML से  14, 21, 62, 698 से वसूली का हकदार है क्योंकि ये विवाद जुलाई 2010 में शुरु हुआ जब TML ने गडबडी   सही करने और जवाबदेही लेने से इंकार कर दिया।

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