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सभी धर्म जाति के लोगों को समान अवसर देता है देश, तभी चाय वाला पीएम, दलित राष्ट्रपति और पोस्टर लगाने वाला बना वीपी : CJI खेहर

LiveLaw News Network
15 Aug 2017 12:42 PM GMT
सभी धर्म जाति के लोगों को समान अवसर देता है देश, तभी चाय वाला पीएम, दलित राष्ट्रपति और पोस्टर लगाने वाला बना वीपी :  CJI खेहर
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देश के मुख्य न्यायधीश जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि देशवासियों को अपने भारतीय होने पर गर्व करना चाहिए क्योकि ये देश सभी धर्म और जाति के लोगों को समान अवसर प्रदान करता है। इस बात पर सभी को फक्र होना चाहिए कि ये देश सभी धर्मों का एक जैसा सम्मान करता है।
सुप्रीम कोर्ट में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के 71 वें समारोह में बोलते हुए CJI खेहर ने उदाहरण देते हुए कहा कि  हमारे राष्ट्रपति दलित हैं जो गरीबी में रहे हैं। उप राष्ट्रपति जो पहले पोस्टर लगाते थे और प्रधानमंत्री जो चाय बेचते थे। ये ही आजादी होती है जब आप इसके चलते हर चीज को पा सकते हैं।  हर कोई आज एक साथ है। चाहे वो ब्राह्मण का बेटा हो, दलित का हो हर कोई एक समान है। जो चाहे वो पा सकता है।है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आर एस सूरी के जजों के बच्चे भी जज बनने और सरकारी पैनल लेने  की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए CJI खेहर ने कहा कि न्यायपालिका को पैसे कमाने की जगह समझने की बजाए  इसका सम्मान करना चाहिए। मैने एक पेपर पर पढ़ा जिसपर लिखा था कि CJI के बेटे पंजाब सरकार के पैनल में नियुक्त हुए है। मैंने बेटे से पूछा क्या कि तुम नियुक्त हो गए हो, क्या कभी तुमने रिश्वत ली, क्या तुम्हें लेटर मिला तो उसने मना किया और कहा खेहर के नाम का एक और आदमी नियुक्त नियुक्त हुआ है। जस्टिस खेहर ने कहा कि  बार प्रेजिडेंट को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए। बच्चे समझदार हैं चाहे वो जजों के हों या किसी ओर के। जजों से बच्चों के बारे में कही गई बातें हमेशा सच नहीं होती।

CJI खेहर ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि चंडीगढ में उनके  बेटे ने टी शर्ट कई सालों पहले दी थी। लेकिन टी शर्ट पर जो लिखा था जो मायने रखता है। जिसपर लिखा था  'मैं जन्म और इच्छा से सिख हूं और मुझे सिख होने पर गर्व है। ' जस्टिस खेहर ने कहा कि उस टी शर्ट को पहना तो बहुत अच्छा लगा तब उन्होंने सोचा कि इसे पहले क्यों नहीं पहना। इसी तरह वकील अलग अलग धर्मो से है। वो सभी अपने धर्म और भारत के नागरिक होने पर गर्व करते है।
CJI खेहर ने बताया कि वो केन्या के नागरिक थे और अब भारत के मुख्य न्यायधीश हैं। उस वक्त  ब्रिटिश प्रथम नागरिक थे। दूसरे दर्जे के अमेरिकन, तीसरे दर्जे पर यूरोपियन चौथे पर अफ्रीकन और फिर एशियन। जब चारों में से कोई नही हो तभी भारतीय को मौका मिलता था।

उन्होंने कहा कि आज उन लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने देश के लिए कुरबानी दी। कुछ के नाम हम जानते है कुछ के नही। लेकिन स्वतन्त्रता का मतलब क्या है ?
- कुरबानी का मतलब केवल देश के लिए मर मिटाना नही है। स्वतंत्रता में उन लोगों को भी याद किया जाना चाहिए जिन्होंने स्वतन्त्रा के लिए देश को छोड़ा। स्वतन्त्रा दिवस पर पुरानी बातों को याद करते है और रिपब्लिक डे पर भविष्य की तरफ।

स्वतंत्रता संग्राम और आजादी दिलाने में वकीलों की भी बेहद अहम भूमिका थी। वकीलों का काम अभी खत्म नही हुआ। स्वतंत्रता को उस स्तर तक ले जाना है जहाँ हर लोग खुश रहे।जस्टिस खेहर ने कहा उन्होंने इलाहाबाद में कहा था कि छुटियों के समय जज और वकील भी काम करें ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके। ये आपका सहयोग होगा देश के लिए देश की उन्नति और तरक्की के लिए। साथ ही इससे जुडे लोगों को सेवा कर देश का कर्ज अदा करना चाहिए।

वहीं इस मौके पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें खुशी है कि जस्टिस खेहर के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की सबसे ज्यादा नियुक्तियां हुई हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को निचली अदालतों में नियुक्तियों के लिए बेहतर और पारदर्शी चयन प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।
वहीं पद संभालने के बाद पहली बार बोल रहे अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने देश से गरीबी हटाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सबसे बडी चुनौती गरीब लोगों के लिए है और इसके लिए सतत प्रयास किए जाने चाहिए।

इसके लिए भ्रष्टाचार को मिटाए जाने की जरूरत है और ये काम न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका को मिलकर करना होगा। उन्होंने कहा कि दुखद है कि 70 साल भी राज्य गरीब लोगों तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा पाए हैं।

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