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कोलकाता हाईकोर्ट का अहम कदम, सरदार सरोवर इलाके में फिलहाल नहीं होगी तोडफोड

LiveLaw News Network
12 Aug 2017 8:20 AM GMT
कोलकाता हाईकोर्ट का अहम कदम, सरदार सरोवर इलाके में फिलहाल नहीं होगी तोडफोड
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम कदम उठाते हुए कोलकाता के सुभाष सरोवर इलाके में स्लम एरिया में तोडफोड पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने ये अंतरिम आदेश इंक्रीजिंग डाइवर्सिटी बाय इंक्रीजिंग एक्सेस ( IDIA) संस्था की याचिका पर जारी किया है।

कलकत्ता हाईकोर्ट में जस्टिस रंजीत कुमार बाग ने ये अंतरिम आदेश सुभाष सरोवर के सौंदर्यीकरण के लिए बनाए गए रेज्युवेनेशन रिडव्लपमेंट आफ सुभाष सरोवर कोलकात्ता ( फेस 1, ब्यूटीफिकेशन एंड एलाइड वर्क्स नामक प्रोजेक्ट के चलते इलाके में तोडफोड के आदेश के चलते जारी किए हैं।

ये प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल सरकार के पर्यटन विभाग के साथ साथ कोलकाता मेट्रोपालिटन डवलपमेंट अथारिटी ( KMDA) और कोलकाता इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ( KIT) द्वारा बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत क्षेत्र में फूड कोर्ट, जागर्स पार्क, ओपन एयर थिएटर जैसी सुविधाएं बनाने का प्रस्ताव है जबकि इसी जगह पर एक दशक से ज्यादा वक्त से करीब 22  बेघर परिवार रह रहे हैं।

सरकार के इसी फैसले को यहां रहने वाले तीन लोगों ने चुनौती दी है जिनमें 80 साल के बुजुर्ग शिव शंकर रे भी शामिल हैं। इम लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने यहां रहने वाले लोगों के प्रति गंभीर उदासीनता दिखाई है और प्रशासन अपने  वैधानिक दायित्व को निभाने में नाकाम रहा है।

याचिका में कहा गया है कि सरकार स्लम में रह रहे लोगों को जबरन बाहर निकाल रही है। इस बारे में ना तो लोगों को कोई नोटिस जारी किया गया और ना ही कोई पुर्नवास योजना बनाई गई। कोर्ट को ये भी बताया गया कि इस मामले में पुलिस अफसरों को भी प्रोजेक्ट की शिकायत की गई लेकिन पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया।

याचिका में कहा गया है कि पुलिस और एजेंसियों की उदासीनता के चलते सुभाष सरोवर इलाके के लोगों के सामने जो हालात पैदा हुए हैं वो भारत के संविधान में दिए जीने और आश्रय के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। इस संबंध में सरकारी एजेंसियों को कई बार ज्ञापन दिया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। स्लम में रहने वाले लोगों को जगह खाली करने के लिए धमकाया जा रहा है कि अगर वो नहीं हटे तो यहां रातोंरात बुलडोजर चला दिया जाएगा।

हाईकोर्ट में कहा गया है कि सरकार का ये कदम सीधे सीधे गरिमापूर्व जीवन जीने से अधिकार का गंभीर उल्लंघन है जो रोटी, कपडा और मकान का अधिकार भी देता है। एेसे में एजेंसियों का ये मनमाना तरीका संविधान के आर्टिकल 14, 19, 21 और 300 A का उल्लंघन है।

ये सब ग्राउंड हाईकोर्ट के सामने रखते हुए याचिका में स्लम इलाके में तोडफोड रोकने के आदेश जारी करने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि सरकार को इन लोगों के पुनर्वास के लिए योजना तैयार करने को कहा जाए जिसमें आवास की वैकल्पिक व्यवस्था हो।

इस मामले मे IDIA के फाउंडर एंड मैनेजिंग ट्रस्टी प्रो.( Dr.) शमनाद बशीर की अगवाई में डायरेक्टर अनर्ब रॉय, कल्पना यादव और श्वेतलाना कौरेया के साथ साथ सहयोगी अभय जै  शामिल रहे। इनके अलावा NUJS कोलकाता को कोलकाता विश्वविद्यालय के कानून विभाग के वालेंटियर ( IDIA स्कोलर बंकिम मंडल और रिंजू कुमारी समेत ) भी सहयोगी रहे। वकील अनिरूद्ध चटर्जी ने अपने सहयोगी कुशल चटर्जी के साथ नि: स्वार्थ कोर्ट में बहस की।

ये आदेश IDIA की नई पहल पब्लिक इंट्रेस्ट लिटीगेशन यानी P-PIL ( प्रोमोटिंग पब्लिक इंट्रेस्ट लायरिंग ) के तहत आया है। इस नई पहल के पीछे सोच ये है कि इसके तहत IDIA के स्कोलर अपने समुदाय के अलावा जनहित के मुद्दों की वकालत कर सकें। ये स्कोलर IDIA के वालेंटियर छात्रों, निदेशकों, नि:स्वार्थ वकीलों, कानूनी संकाय और दूसरे लोगों के साथ मिलकर काम करें ताकि वो जनहित के कार्यों में सहयोग कर सकें।
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