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योग अनिवार्य तौर पर लागू करने वाला मौलिक अधिकार नहींः केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

LiveLaw News Network
8 Aug 2017 12:24 PM GMT
योग अनिवार्य तौर पर लागू करने वाला मौलिक अधिकार नहींः केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
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राइट टु एजुकेशन (आरटीई) एक्ट के तहत कुरिकुलम में योगा कहीं भी दर्ज नहीं है। ऐसे में योग शिक्षा को मौलिक अधिकार के तहत लागू नहीं कराया जा सकताः केंद्र सरकार का हलफऩामा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि योग को मौलिक अधिकार के तहत लागू नहीं कराया जा सकता। आऱटीई के तहत योग शिक्षा का कुरिकुलम में दर्ज नहीं है।

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में दाखिल जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था। पीआईएल में कहा गया था कि राइट टु चिल्ड्रेन टु फ्री एंड कंपलसरी एजुकेशन (आरटीई) एक्ट 2009 और नैशनल कुरिकुलम फ्रेमवर्क के तहत पहली से आठवीं तक के स्टूडेंट को योग शिक्षा अनिवार्य तौर पर दिया जाए।

केंद्र की ओर से एचआऱडी मिनिस्ट्री ने हलफनामा दायर कर कहा है कि आरटीई में योग शिक्षा को कुरिकुलम (पाठ्यक्रम) के तौर पर नहीं रखा गया है। ऐसे में मौलिक अधिकार के तहत योग शिक्षा को अनिवार्य नहीं किया जा सकता। योग पाठ्यक्रम का हिस्सा है और ये हेल्थ और शारीरिक शिक्षा में शामिल है। ये पहली से सेलकर दसवीं तक की पढ़ाई में अनिवार्य विषय है। स्कूली शिक्षा में योग शिक्षा को नजरअंदाज नहीं किया गया है।

छह साल से 14 साल तक के बच्चों की पढ़ाई में योग शिक्षा को भी अनिवार्य बनाए जाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने विचार को कहा था। जस्टिस मदन बी लोकूर औऱ जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की बेंच में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय और और जेसी सेठ की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि योग को अनिवार्य तौर पर पढ़ाया जाए। इस मामले में याचिकाकर्ता ने एचआरडी, एनसीईआरटी, एनसीटीई और सीबीएसई को निर्देश देने की मांग की थी कि पहली से आठवीं तक के स्टूडेंट को योग शिक्षा के लिए टेक्स्ट बुक दिया जाए और इसे राइट टु एजुकेशन एक्ट के तहत मौलिक अधिकार के दायरे में देखा जाए। केंद्र ने ये भी कहा कि एजुकेशन समवर्ती सूची में है और ऐसे में राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश देखेगी कि एससीएफ का पालन कैसे हो जिसमें योगा को हेल्थ और शारीरिक शिक्षा के पार्ट के तौर पर माना गया है।

एनसीएफ 2005 के मुताबिक योग को प्राइमरी लेवल पर ही एजुकेशन में शामिल किया जाए। लेकिन औपचारिक तौर पर उसे छठी क्लास से शुरु किया जाता है। सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है और पहली से लेकर 10 वीं तक की पढ़ाई में योग की पढ़ाई शामिल है।

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