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अब वख़्त आ गया है कि झूठी मुकदमेबाज़ी को हतोत्साहित किया जाए: दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढें]

LiveLaw News Network
31 July 2017 3:49 PM GMT
अब वख़्त आ गया है कि झूठी मुकदमेबाज़ी को हतोत्साहित किया जाए: दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढें]
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दिल्ली हाई कोर्ट ने गैर जरूरी वाद पर नाराजगी जाहिर की है और इस तरह की अर्जी दाखिल करने वाले वादी पर 2 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि ये प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

हाई कोर्ट के जस्टिस वाल्मिकी जे मेहता की बेंच ने कहा कि देश में गैर जरूरी वाद में काफी बढ़ोतरी हुई है और समय आ गया है कि उसे खत्म किया जाए और डिस्करेज किया जाए। याचिकाकर्ता कुलदीप अग्रवाल ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने अर्जी खारिज करते हुए हर्जाना लगाया है।

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा कि वह किरायेदार नहीं हैं बल्कि प्रॉपर्टी खरीदी है। तब जज ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ने प्रॉपर्टी खऱीद से संबंधित कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है। प्रॉपर्टी खरीद के सपोर्ट में कोई साक्ष्य नहीं है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी का दस्तावेज होना चाहिए और वह रजिस्टर्ड दस्तावेज मौजूद नहीं है। ट्रायल कोर्ट ने इसी आधार पर याची की दलील खारिज कर दी थई। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका के साथ दावे के सपोर्ट में कोई दस्ताेज नहीं है। याचिका गैर जरूरी है। याचिकाकर्ता गैर कानूनी तरीके से प्रॉपर्ट में रह रहा था। ऐसे में उस पर हर्जाना लगाया जाता है और तीन हफ्ते में दो लाख डिपॉजिट किया जाए।




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