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दिल्ली हाई कोर्ट ने स्कूल में फ्री सिनेटरी नेपकीन के लिए याचिका पर सरकार से मांगा जवाब [याचिका पढें]

LiveLaw News Network
20 July 2017 7:31 AM GMT
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्कूल में फ्री सिनेटरी नेपकीन के लिए याचिका पर सरकार से मांगा जवाब [याचिका पढें]
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दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि ऐसी बच्चियों को स्कूल छोड़ने से रोका जाए जो सिनेटरी प्रोडक्ट के अभाव में ऐसा करने पर मजबूर हो रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चियों को मासिक धर्म के बारे में पढ़ाया जाए साथ ही सिनेटरी पैड आदि फ्री में मुहैया कराई जाए।

दिल्ली हाई कोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही मामले में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से भी जवाब मांगा गया है। पीआईएल एक वकील सेतु निकेत की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि एक राष्ट्रीय स्तर पर पॉलिसी बनाई जाए जो ये मैकेनिज्म तय करे कि कैसे बच्चियों को इस मामले में जागरुक किया जाएगा साथ ही मासिक धर्म से सबंधित सिनेटरी प्रोडक्ट आदि स्कूल में मुहैया कराई जाए।

याचिकाकर्ता की वकील इशा मजूमदार ने अर्जी दाखिल कर कहा कि 10 साल से ज्यादा उम्र की बच्चियां खासकर जो गरीब तबके की हैं वह स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं। प्यूबर्टी की उम्र में आने के बाद ये बच्यियां सिनेटरी पैड आदि के अभाव में और एजुकेशन के अभाव में स्कूल छोड़ देती हैं। एजुकेशन की कमी और अनहेल्दी कंडिशन के कारण ऐसी बच्चियां स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो जात ीहैं।

पीआईएल में कहा गया है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत ये जरूरी है कि प्रत्येक बच्चियों को बुनियादी सुविधा मिले ताकि वह एजुकेशन पूरा कर सकें। लेकिन सरकारें राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत बच्चियों को सुविधाएं देने में विफल हो रही हैं इसी कारण बच्चियां जब प्यूबर्टी एज में जाती हैं तो मासिक धर्म आदि के कारण एजुकेशन के अभाव में स्कूल छोड़ रही हैं। स्कूल में सिनेटरी प्रॉडक्ट का अभाव है। याचिका में कहा गया है कि सर्वे कहता है कि प्यूबर्टी एज में सबसे ज्यादा बच्चियां ड्रॉप आउट होती हैं। सिटिजन ब्यूरो की 31 मार्च 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक 20 फीसदी लड़कियां प्यूबर्टी की उम्र में स्कूल छोड़ देती हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक सिनेटरी पैड की अनउलब्धता इसके प्रमुख कारण है। कोर्ट को बताया गया कि राइट टू एजुकेशन एक्ट में केन्या में फ्री सिनेटरी पैड को शामिल किया गया है।

पीआईएल में निम्नलिखित मांगे की गई है -

-एक नैशनल लेवल की पॉलिसी बनाई जाए जो मैकेनिज्म तैयार करे ताकि स्कूल जाने वाली बच्चियों को इस बारे में एजुकेशन दिया जाए और उन्हें सिनेटरी प्रॉडक्ट आदि की उपलब्धता सुनिश्चित हो।

-ये पॉलिसी को एजुकेशन, गर्ल स्कूल से लेकर तमाम सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में लागू होना सुनिश्चित हो।

-बच्चियों को फ्री में या फिर कम रेट पर सिनेटरी प्रोडक्ट मिले इसके लिए लोकल हेल्थ सेंटर या क्लिनिक से सहयोग लिया जाए।

-10 से 14 साल की बच्चियों को मासिक धर्म के बारे में अनिवार्य तौर पर शिक्षित किया जाए।

-इसके लिए ट्रेंड फीमेल टीचर की उपलब्धता सुनिश्चित हो और वीकली या फिर हर महीने इस बारे में एजुकेट किया जाए।




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