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राष्ट्रपति चुनाव में दल बदल कानून लागू नहीं होताः चुनाव आयोग ने दिया स्पष्टीकरण

LiveLaw News Network
8 July 2017 12:10 PM GMT
राष्ट्रपति चुनाव में दल बदल कानून लागू नहीं होताः चुनाव आयोग ने दिया स्पष्टीकरण
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राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है कि राष्ट्रपति चुनाव में दल बदल कानून लागू नहीं होता। चुनाव आयोग ने गुरुवार को इसके लिए स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि हर वोटर अपनी मर्जी से राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने का हकदार है।

चुनाव आयोग ने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव में किसे वोट देना है किसे वोट नहीं देना है ये वोटर के खुद पर निर्भर करता है और इसके लिए वह स्वतंत्र है। संविधान की 10 वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की श्रेणी में ये नहीं आता है। वोटर को इस बात की लिबर्टी है कि वह राष्ट्रपति चुनाव में किसे वोट दे और किसे न दे। राष्ट्रपति चुनाव में राजनीतिक पार्टी इस बात के लिए स्वतंत्र है कि वह वोट मांग सकती है और इसके लिए आग्रह कर सकती है। कोई भी पार्टी इसके लिए व्हीप जारी नहीं कर सकती कि उनके मेंबर अमुक कैंडिडेट को वोट दें। अगर इस तरह का निर्देश जारी होता है तो वह आईपीसी की धारा-171 सी के तहत अवांछित दबाव माना जाएगा।

राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने साफ किया है कि राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग अनिवार्य नहीं है जैसे सदन में वोटिंग अनिवार्य नहीं होता। ये वोटर के अधिकार हैं कि वह आईपीसी की धारा 171 ए (बी) के तहत अपनी मर्जी से जिसे वोट देना चाहता है वह दे सकता है या नहीं दे सकता या फिर चुनाव में खड़ा हो सकता है या नहीं हो सकता, ये उसका खुद का अधिकार है।

राष्ट्रपति चुनाव में वोटर को इस बात का अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से किसी कैंडिडेट को वोट दे या नहीं। चुनाव आयोग ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजेमेंट का हवाला दिया। कुलदीप नैयर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एआईआर 2006 एससी 3127 और पशुपति नाथ शुक्ल बनाम नेम चंद्र जैन एआईआर 1984 एससी 399 के केस में व्यवस्था दी थी कि राज्यसभा चुनाव में दल बदल कानून लागू नहीं होता। चुनाव आयोग ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का ये जजमेंट राष्ट्रपति चुनाव पर भी लागू होता है।
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