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एनडीपीएस एक्ट,एक अनुमानित कानून है, व्याख्या में सख्ती जरूरी-सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
14 Jun 2017 7:24 AM GMT
एनडीपीएस एक्ट,एक अनुमानित कानून है, व्याख्या में सख्ती जरूरी-सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने मादक पदार्थ निरोधक कानून के तहत पंजाब के लुधियाना के एक शख्स को बरी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राॅव व न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की बेंच ने गुरूवार को एनडीपीएस एक्ट के मामले में लुधियाना की अडिशनल सेशन जज के उस फैसले को सही ठहराया है,जिसमें एक आरोपी को बरी कर दिया गया था,हालांकि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था।

हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया था और उसे दस साल कैद व एक लाख रूपए जुर्माने की सजा दी थी। यह सजा एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 15 के तहत दी गई थी। बाद में इसी फैसले को आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा ने इस फैसले में कहा कि जांच में खामियां पाए जाने के बाद भी हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया था,जिसके तहत आरोपी को बरी कर दिया गया था और उसे दोषी करार देते हुए सजा दे दी। इस मामले में एक अन्य सहआरोपी भी था। जिसे हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था। परंतु उसके मामले में राज्य सरकार ने उस फैसले के खिलाफ अपील दायर नहीं की। कोर्ट राज्य सरकार के इस तरह किए गए भेदभाव के लिए काफी गंभीर है। जिसके तहत सिर्फ इसी आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई।

इसलिए न्याय का तकाजा यही कहता है कि सेशन कोर्ट के उस आदेश को ही सही माना जाए,जिसके तहत याचिकाकर्ता को बरी कर दिया गया था। इसी के साथ हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया जाता है। इसलिए आरोपी मोहिंद्र सिंह की अपील को स्वीकार करते हुए उसे बरी किया जाता है,अगर वह किसी अन्य केस में वांछित नहीं है तो उसे छोड़ दिया जाए।

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