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बच्चे के बयान पर भी हो सकती है सजा-सुप्रीम कोर्ट बच्चे का बयान होना चाहिए विश्वसनीय

LiveLaw News Network
31 May 2017 2:43 PM GMT
बच्चे के बयान पर भी हो सकती है सजा-सुप्रीम कोर्ट बच्चे का बयान होना चाहिए विश्वसनीय
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12 साल के बच्चे के बयान के आधार पर उसके पिता की हत्या के मामले में बच्चे की मां को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर बच्चे का बयान विश्वसनीय हो तो उस बयान के आधार पर सजा हो सकती है और किसी पूरक साक्ष्य की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राॅव व न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की खंडपीठ ने उस महिला की सजा को उचित ठहराया है,जिसे उसके पति की हत्या के मामले में दोषी पाया गया था। इस मामले में महिला का बारह साल का बेटा गवाह था,जिसने बताया था कि घटना के समय उसकी मां कमरे में मौजूद थी और उसके पिता की हत्या दो लोगों ने की थी। उसके पिता पर हमले करने वाले एक आरोपी के कहने पर उसकी मां ने उस कमरे से बाहर जाने के लिए कहा था।

निचली अदालत व पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने-अपने फैसलों में इस बच्चे के बयान को विश्वसनीय पाया था।

न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा ने इस मामले में फैसला लिखवाते हुए कहा कि हमें इस मामले में थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि इस तरह की घटना के समय याचिकाकर्ता महिला न तो खुद अपने किसी पड़ोसी को बुलाने गई और न ही अपने बेटे को किसी के घर बुलाने के लिए भेजा।जबकि आमतौर पर इस तरह की घटना के समय ऐसे ही व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।

सच्चाई यह है कि न तो उसने शोर मचाया और न ही किसी से मदद मांगी,उसके इस व्यवहार के कारण अभियोजन पक्ष का केस मजबूत हुआ है। न ही इस बात की अनदेखी की जा सकती है कि इस बच्चे ने न तो किसी अन्य परिजन के खिलाफ गवाही दी और न ही किसी अजनबी के खिलाफ बल्कि उसने अपनी मां के खिलाफ गवाही दी है। जिसके लिए साहस की जरूरत है क्योंकि उसने अपनी मां को सजा दिलाई है। वही इस बच्चे को इतनी समझ थी कि वह हत्या के मामले में उचित गवाही दे सके।

इतना ही नहीं इस बच्चे ने घटना में शामिल अन्य दो आरोपियों की भी ठीक से पहचान की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई उचित कारण नहीं है,इसलिए महिला की अपील को खारिज किया जाता है।

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