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जस्टिस कर्णन की होगी मेडिकल जांचः सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
31 May 2017 2:12 PM GMT
जस्टिस कर्णन की होगी मेडिकल जांचः सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जस्टिस सीएस कर्णन की मेडिकल जांच के आदेश दिए है। जस्टिस कर्णन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संवैधानिक बेंच में अदालत की अवमानना की कार्रवाई चल रही है।

बेंच ने पाया कि वह अपना पक्ष रखने की स्थिति में नहीं है। बेंच ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह एक पुलिस टीम बनाए,जो जांच में मेडिकल बोर्ड की सहायता करेगी। मेडिकल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट 8 मई को कोर्ट को सौंपनी है।

दरअसल बेंच पिछले दिनों जस्टिस कर्णन द्वारा दिए गए दो आदेशों से सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। इन आदेश में जस्टिस कर्णन ने सात सदस्यीय बेंच के जजों को समन किया था और एयर कंट्रोल अॅथाटिरटी को निर्देश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच के जजों को विदेश न जाने दे।

मुख्य न्यायाधीश जे एस केहर ने कहा कि यह पूरी तरह हमारे आदेश का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को न्यायिक व प्रशासनिक काम करने से रोक दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से जस्टिस कर्णन ने आदेश पारित किया है वह जस्टिस कर्णन द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए लिखे गए पत्र से भी ज्यादा गंभीर था। बेंच ने सभी अदालतों,ट्रिब्यूनल और आयोगों को निर्देश दिया है कि जस्टिस कर्णन द्वारा 8 फरवरी 2017 को दिए गए आदेशों पर विचार न करें।

आज का आदेश

जस्टिस सी एस कर्णन को आठ फरवरी 2017 को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया गया था अब से उनको किसी भी तरह का न्यायिक व प्रशासनिक आदेश देने से रोका जाता है। साथ ही उनको कहा गया था कि वह हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सभी केस की फाइलों लौटा दें।

परंतु अवमानना की कार्रवाई शुरू होने के बाद भी जस्टिस कर्णन ने प्रेस स्टेटमेंट जारी की। 31 मार्च 2017 को इस मामले में जब पिछली सुनवाई हुई थी,उसके बावजूद भी जस्टिस कर्णन ने कुछ न्यायिक आदेश पारित कर दिए,जो इस कोर्ट को मिले। कोई भी अदालत,ट्रिब्यूनल और आयोग जस्टिस कर्णन के इन आदेशों पर संज्ञान न ले,यह सुनिश्चित करने के लिए हम सभी को इन आदेशों पर विचार करने से रोक रहे है।

जस्टिस कर्णन द्वारा जारी दिए गए आदेश व प्रेस ब्रीफिंग को देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि वह इस केस में अपना पक्ष रखने की स्थिति में नहीं है। इसलिए इस मामले में यह उचित होगा कि सरकारी अस्पताल का मेडिकल बोर्ड उनकी मेडिकल जांच करे।

विवादित ट्वीस्ट और अब तक का घटनाक्रम

-कर्णन 31 मार्च को अपनी हठ छोड़ते आखिरकार मुख्य न्यायाधीश जे एस केहर,न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा,न्यायमूर्ति जे चेलेमेश्वर,न्यायमूर्ति रंजन गोगोई,न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर,न्यायमूर्ति पी सी घोष व न्यायमूर्ति कुरेन जोसेफ वाली सात जजों की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए। वह कंटेम्प्ट आॅफ कोर्ट के मामले में इस खंडपीठ के समक्ष पेश हुए थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ रिटायर्ड व वर्तमान में तैनात जजों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए है। इसके लिए उन्होंने दो पेज का एक पत्र भी लिखा था। परंतु वह बार-बार अपना स्टैंड बदलते रहे। कभी वह माफी मांगने के लिए तैयार हो गए तो कभी कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट उनको जेल भेज दे। उसके बावजूद भी वह बार-बार भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे। बेंच ने उनको लिखित जवाब दायर करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था।

-13 अप्रैल को जस्टिस कर्णन ने एक आदेश जारी करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश व अन्य छह जजों को उनके समक्ष पेश होने का आदेश दे दिया। इस आदेश में कहा गया था कि सभी जज 24 अप्रैल को उनके न्यू टाउन आवास पर पेश हो क्योंकि उन्होंने एक दलित के अधिकारों का उल्लंघन किया है और उसे पब्लिक के सामने प्रताड़ित किया है।

-कर्णन ने अपने घर पर मीडिया को बुलाया और स्वत संज्ञान लेते हुए ’ राष्ट्रहित में जनरल पब्लिक की रक्षा करने के लिए’ एक आदेश जारी कर दिया।
-कर्णन ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के सात जजों को नेशनल आॅफेंडर बताया और कहा कि उन्होंने उसके प्रति उसकी जाति के चलते भेदभाव किया है और 31 मार्च को उसकी मेंटल हेल्थ के बारे में सवाल करके उसकी बेइज्जती की है। इसलिए सभी सात जज एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपी है। यह बातें कर्णन ने अपने नौ पेज के आदेश में कही थी। साथ ही कहा कि सभी जज उनके समक्ष उनके आवास पर पेश हो और सजा के संबंध में अपने विचार बताए।

-पिछले गुरूवार को एक आदेश में कर्णन ने एयरपोर्ट अॅथारिटी,नई दिल्ली के निदेशक को निर्देश दिया कि इन सात जजों में से किसी को भी विदेश जाने की अनुमति न दे। साथ ही कहा कि सभी जज अपने पासपासेर्ट दिल्ली पुलिस के डायरेक्टर जनरल के पास सरेंडर कर दे। इनमें से किसी भी जज को उसके आदेश के खिलाफ दूसरी कोर्ट में न जाने दिया जाए। परंतु उसके आदेश को चुनौती देने के लिए संसद जा सकते है।

-इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को भी निर्देश दिया गया था कि इन सात जजों में से किसी को भी तब तक पेंशन बेनिफिट का पैसा न दिया,जब तक उसके पूर्व के आदेश में जिक्र किए गए 14 करोड़ रूपए का मुआवजा उसे नहीं मिल जाता है। इतना ही नहीं भारत के साथ अच्छे संबंध रखने वाली फाॅरेन कंट्री से भी उन्होंने अपील की थी कि इन सात जजों को वह अपने देश का वीजा न दे।

-भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अनोखा आदेश देते हुए दस मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने कर्णन के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिए थे क्योंकि वह कोर्ट की अवमानना के मामले में नोटिस जारी होने के बाद भी कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हुए थे।

-इस पूरे घटनाक्रम में और नाटकीय मोड़ देते हुए कर्णन ने कोलकात में एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और इन वारंट को असंवैधानिक करार दे दिया और आरोप लगाया कि वह दलित है,इसलिए उसे टारगेट किया जा रहा है।

-इतना ही नहीं उसने यह भी कह दिया कि कोर्ट का यह आदेश एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध है और चुनौती देते हुए कहा कि उसके केस को संसद को रेफर कर दिया जाए।

जस्टिस कर्णन ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच के आदेश देने की मांग की थी। इसके अलावा कर्णन अपने विद्रोही या अपरंपरागत रवैये के लिए के भी जाने जाते है। उन्होंने कोलिज्म के उस निर्णय का भी विरोध किया था,जिसके तहत उनका तबादला मद्रास से कोलकाता कर दिया गया था और खुद ही उस आदेश पर रोक लगा दी थी।

पिछले साल फरवरी में वह कथित तौर पर मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल (इस समय सुप्रीम कोर्ट में जज है) के पर्सनल सेक्रेटरी कम रजिस्ट्रार पर चिल्लाने लग गए थे और अपने तबादले के आदेश पर स्वत संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया था कि वह जस्टिस कर्णन के तबादले के चलते उनको कोई न्यायिक काम न सौंपे।

इसी बीच वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने जस्टिस कर्णन को एक सख्त पत्र लिखते हुए उनको विक्षिप्त कह दिया। साथ ही कहा कि यह अचंभे वाली बात होगी कि अगर वह बतौर जज अपनी ड्यूटी पूरी करने के लिए मानसिक तौर पर सही था तो। साथ ही कहा कि वह अपनी सभी बेवकूफी भरी हरकतों के लिए माफी मांग ले।

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