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सर्विस मामलों में दायर जनहित याचिका नहीं है सुनवाई योग्य-दिल्ली हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
31 May 2017 2:08 PM GMT
सर्विस मामलों में दायर जनहित याचिका नहीं है सुनवाई योग्य-दिल्ली हाईकोर्ट
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा है कि सर्विस मामलों में जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती है। साथ ही उस याचिका को खारिज कर दिया जो कुछ कर्मचारियों की तरफ से एक नाॅन-लीगल एंटीटी ने दायर की थी।

न्यायमूर्ति वी.जे मेहता ने कहा कि जिसकी किसी मामले में अधिस्थिति है,वही कोर्ट आ सकता है,परंतु उनकी तरफ से कोई और याचिका नहीं दायर कर सकता है। वही सर्विस के मामलों संबंधी कानून के अनुसार जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती है।

कोर्ट इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी,जो फोरम आॅफ एस.सी/एस.टी लेजिस्लेटर एंड पार्लियामेंटरीयंस की तरफ से दायर की गई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि आॅयल एंड नेचुरल गैस काॅरपोरेशन के ई-8 लेवल के अधिकारियों को अवैध तरीके से प्रमोशन नहीं दी जा रही है।

हालांकि कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को इस मामले में याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता वो व्यक्ति नहीं है,जो इस मामले में प्रभावित हुए हैं।

कोर्ट ने कहा कि अगर कुछ कर्मचारियों को अगर गलत तरीके से प्रमोशन नहीं दिया गया है तो वह इसके लिए कोर्ट आ सकते हैं,न कि याचिकाकर्ता की तरह नाॅन-लीगल व्यक्ति। वहीं जहां तक नाॅन-लीगल व्यक्ति या एंटीटी की तरफ से याचिका दायर करने की बात है तो कोर्ट उनको इस मामले में कोई निर्देश या हलफनामा दायर करने के लिए नहीं कह सकती है क्योंकि याचिकाकर्ता कह सकता है कि वह कोर्ट के आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं है।

स्पेशिफिक रिलीफ एक्ट 1963 की धारा 41(जे) के तहत उस व्यक्ति को आदेश नहीं दिया जा सकता है,जिसका मामले से कोई लेना-देना न हो। इसलिए इस मामले में याचिकाकर्ता को कोई व्यक्तिगत हित नहीं है। इस मामले में व्यक्तिगत उन कर्मचारियों का है,जो इस तरह प्रमोशन न मिलने से प्रभावित हुए है।

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