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लाॅ कमिशन ने सौंपी 265वीं रिपोर्ट-नाबालिग के गुजारे भत्ते से मिली आय पर छूट देने के संबंध पेश की संभावनाएं

LiveLaw News Network
31 May 2017 2:04 PM GMT
लाॅ कमिशन ने सौंपी 265वीं रिपोर्ट-नाबालिग के गुजारे भत्ते से मिली आय पर छूट देने के संबंध पेश की संभावनाएं
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लॉ कमिशन से अनुशंसा की है कि- बच्चे को मिले गुजारे भत्ते की राशि को उसके नाम जमा कराने से ब्याज के तौर पर मिली आय को उसके माता-पिता या गार्जियन की आय में जोड़ देने से छूट देने की जरूरत नहीं है। अगर इस तरह की छूट दे दी गई तो टैक्स से बचने के मामलों में बाढ़ आ जाएगी।

सोमवार को लाॅ कमिशन आॅफ इंडिया ने अपनी 265 वी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। जिसका टाईटल है- नाबालिग के गुजारे भत्ते से मिली आय पर छूट देने के संबंध पेश में संभावनाएं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ’पायल मेहता बनाम संजय सरीन’ केस की सुनवाई करते हुए इस मामले को लॉ कमिशन के पास भेजा था ताकि इस बात पर विचार किया जा सकें कि क्या इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 64(1ए) में संशोधन की जरूरत है ताकि एक नाबालिग को गुजारे भत्ते के तौर पर मिले पैसे को जमा कराने पर ब्याज से मिली आय को उसके माता-पिता की आय में जोड़ने से छूट दी जा सकती है।

इस मामले में दलील दी गई थी कि नाबालिग को गुजारे भत्ते के तौर पर जो पैसा मिला है और उसे जमा कराने पर ब्याज के रूप में जो आय आई है,उसके टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाए। इस आय को मां या पिता की आय में जोड़कर टैक्स नहीं लिया जाना चाहिए।

इस मामले में दो सदस्यीय खंडपीठ के जस्टिस राजीव भल्ला व जस्टिस लिसा गिरी ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत उस आय पर छूट नहीं दी जाती है जो एक नाबालिग को मिले गुजारे भत्ते पर ब्याज के तौर पर मिली है क्योंकि इस आय को उसके माता या पिता की आय में जोड़ दिया जाता है। इसलिए नाबालिग को उसी दर से टैक्स देना पड़ता है,जिस दर से उसके माता या पिता देते है। इसलिए इस मामले को लाॅ कमिशन आॅफ इंडिया और महिला एंव बाल विकास मंत्रालय के पास भेजा जा रहा है ताकि वह इस बात पर विचार कर सकें कि इनकम टैक्स एक्ट 1961 में संशोधन की जरूरत है या नहीं। ताकि नाबालिग को मिले गुजारे को टैक्स के दायरे से बाहर रखा जा सकें।

लाॅ कमिशन की अध्यक्षता जस्टिस बी.एस चैहान ने की थी और निम्नलिखित सिफारिश सरकार से की है-कमिशन का मानना है कि एक नाबालिग को मिले गुजारे भत्ते पर ब्याज से मिली आय को उसके माता-पिता की आय में जोड़ने से छूट देने की जरूरत नहीं है क्योंकि अगर ऐसा किया गया तो टैक्स न देने के मामलों की बाढ़ आ जाएगी और इनकम टैक्स एक्ट की धारा 64(1ए) को शामिल करने का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। इस धारा को इसलिए शामिल किया गया था ताकि टैक्स से बचने आदि के मामलों से निपटा जा सकें।

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