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'ट्रैफिक कानूनों के उल्लंघन के बावजूद, घायल पीड़ितों की दुर्दशा पर विचार करने की मानसिकता की समीक्षा करने का सही समय है': मद्रास हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
23 Feb 2021 7:32 AM GMT
ट्रैफिक कानूनों के उल्लंघन के बावजूद, घायल पीड़ितों की दुर्दशा पर विचार करने की मानसिकता की समीक्षा करने का सही समय है: मद्रास हाईकोर्ट
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मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि यह उन सभी हितधारकों के लिए सही समय है जो मोटर दुर्घटना के मामलों से जूझ रहे हैं और घायल पीड़ितों, द्वारा ट्रैफिक कानूनों के उल्लंघन के बावजूद, की दुर्दशा पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना और उन्हें मुआवजे देने के लिए उनकी मानसिकता की समीक्षा करनी चाहिए।

न्यायमूर्ति के. मुरली शंकर की एकल पीठ ने एक बस चालक के मामले को निपटाने के दौरान, जिसे मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा चार व्यक्तियों को ले जाने वाले दोपहिया वाहन के साथ दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था, कहा कि,

"सभी हितधारकों के लिए हमारी मानसिकता की समीक्षा करने के लिए यह सही समय है कि बड़े और छोटे वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में, बड़े वाहन के चालक को अपकृत्यकर्ता (टॉर्ट-फेसर) के रूप में ठीक करना, क्योंकि अधिकांश मामलों में बड़े वाहन के ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके साथ ही जांच इस तरह से की जा रही है कि दुर्घटना के लिए ड्राइवर जिम्मेदार है।

यह उन सभी लोगों के लिए भी सही समय है, जो मोटर दुर्घटना से जूझ रहे हैं, कानून और नियमों का उल्लंघन करने से दुर्घटना में घायल व्यक्ति या मृतक पीड़ित के कानूनी उत्तराधिकारियों की सहानुभूतिपूर्वक और मुआवजे के ऑवर्ड पर विचार करने की मानसिकता की समीक्षा करते हैं।"

तर्क

इस मामले में अपीलकर्ता-बस चालक ने प्रस्तुत किया कि चार व्यक्तियों को ले जाने वाला दोपहिया उनके आगे की एक लॉरी से आगे निकलने की कोशिश कर रहा था। उस समय दोपहिया चालक ने यह ध्यान नहीं दिया कि एक बस उनके विपरीत दिशा से आ रहा है।

अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि चार लड़कें, जिनकी इस दुर्घटना में मौत हो गई। यह दुर्घटना उनकी खुद (दोपहिया चालक) की लापरवाही के कारण घटित हुई।

अपीलकर्ता ने आगे कहा कि विपरीत दिशा में लापरवाही से चलाते हुए चार लोगों के साथ आने वाली दोपहिया वाहन को देखते ही, उन्होंने बस को 15 फीट की दूरी पर रोक दिया। हालांकि, दोपहिया वाहन चालक, वाहन को नियंत्रित करने में असमर्थ हो गया और दुर्घटना घटित हुई। इस दुर्घटना की प्रमुख वजह थी कि चार व्यक्ति दुपहिया वाहन में यात्रा कर रहे थे।

दूसरी ओर प्रतिवादी-दावेदारों ने मोहम्मद सिद्दीकी और अन्य बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एंड अन्य 2020 (1) टीएन एमएसी 161 (एससी) के मामले पर भरोसा जताया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह तथ्य स्वीकार किया था कि मोटरसाइकिल ड्राइवर के साथ पीछे सीट पर एक व्यक्ति और उसके पीछे एक और व्यक्ति का बैठना कानून का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन यह स्वयं के द्वारा सिर्फ किया गया कानून का उल्लंघन है। इससे लापरवाही का पता नहीं लगाया जा सकता है, जब तक कि यह स्थापित नहीं हो जाता है कि दो अन्य लोगों ने जो मोटरसाइकिल पर बैठे थे दुर्घटना में योगदान दिया है।

इस प्रकार, यह दावा किया गया कि केवल इसलिए कि चार लड़के मोटर-साइकिल की सवारी कर रहे थे, यह साबित नहीं होगा कि वे इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार हैं।

जाच - परिणाम

अपने आदेश में, एकल न्यायाधीश ने प्रतिक्रियावादी-दावेदारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों को रिर्जव किया। उनका मत था कि दोपहिया वाहन का डिजाइन कुछ इस तरह होता है कि उसमें केवल दो व्यक्ति यात्रा कर सकते हैं।

न्यायाधीश ने देखा कि दोपहिया वाहन पर दो से अधिक व्यक्तियों की सवारी मोटर वाहन अधिनियम की धारा 128 का स्पष्ट उल्लंघन है।

एक अन्य पहलू, हालांकि, न्यायाधीश ने कहा यह भी कहा कि, एक दोपहिया वाहन में दो से अधिक व्यक्तियों की सवारी करना, ड्राइवर के ड्राइविंग शैली / संतुलन को प्रभावित करता है।

बेंच ने कहा कि,

"मान लीजिए कि अगर एक टू व्हीलर सवार दो बड़े व्यक्ति या वजनदार और भारी व्यक्ति या तीन बड़े व्यक्ति हैं, जो केवल एक व्यक्ति के लिए हैं, तो इसका प्रभाव क्या होगा?

सबसे पहले, ड्राइवर को आवश्यक रूप से पेट्रोल टैंक के ऊपर या नजदीक बैठना पड़ेगा, ताकि उन पीछ बैठे तीन सवारी को कुछ जगह दी जा सके, जो ड्राइवर को एक असामान्य स्थिति और मुद्रा में बैठने और सवारी करने के लिए मजबूर करते हैं।

दूसरी बात यह है कि अगर दो या तीन व्यक्तियों को पीछे वाली सीट पर बिठाया जाता है, तो उन्हें जरूरी रूप से ड्राइवर के साथ सटकर बैठना होगा और ड्राइवर निश्चित रूप से दबाव महसूस करेगा। इसके साथ ही पीछे बैठ व्यक्ति भी दबकर बैठे होंगे और वे निश्चित रूप से ड्राइवर को प्रभावित करेंगे। इससे ड्राइविंग की लय और वाहन का संतुलन बिगड़ेगा।

तीसरी बात यह है कि, यदि दो या तीन सवारी के साथ ड्राइविंग करते समय कोई भी हिलेगा, तो इससे राइडर वाहन पर अपना नियंत्रण खो देगा। उपरोक्त परिदृश्य में, राइडर के पैरों और हाथों की गतिविधि प्रतिबंधित हो जाएगी और परिणामस्वरूप वह वाहन पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रख पाएगा।"

पीठ ने आगे कहा कि,

"टू व्हीलर केवल एक राइडर और एक सवारी को लेने के लिए है और किसी भी कीमत पर दो से अधिक व्यक्ति नहीं होने चाहिए। यदि ड्राइवर अपने वाहन में दो या तीन व्यक्तियों को बिठाता है, तो उसे गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए अधिक एक्सलेरेसन देना होगा। एक्सलेरेसन स्तर बनाए रखने के लिए राइडर द्वारा किए गए प्रयासों से उसका ध्यान और एकाग्रता प्रभावित होता है।"

इस पृष्ठभूमि में, न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई सवार 2 व्यक्तियों को पिलर राइडर्स के रूप में लेता है, तो यह खुद लापरवाही नहीं करेगा। उदाहरण के लिए, यदि ड्राइवर अपनी पत्नी और एक बच्चे को ले जाता है या यदि वह 2 छोटे लड़कों या दुबले व्यक्तियों को लेता है, तो वह खुद लापरवाही नहीं करेगा।

हालांकि, यदि राइडर 2 या 3 बड़े व्यक्तियों या मोटे व्यक्तियों को बिठाता है, तो अपने आप में लापरवाही से ड्राइविंग करना माना जाएगा क्योंकि राइडर वाहन के नियंत्रण को किसी भी समय खो सकता है।

एकल पीठ ने कहा कि,

"इस मामले में, चार बड़े छात्रों ने दो पहिया वाहन में यात्रा की थी, इसलिए मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि ड्राइवर और सभी पीलर सवार लापरवाह के साथ यात्रा के लिए दोषी हैं।"

बेंच ने कहा कि दुर्घटना इसलिए हुई क्योंकि राइडर को लॉरी से आगे निकलने के लिए आवश्यक समय की गणना राइडर द्वारा सही से नहीं की जा सकी, क्योंकि वाहन के एक्सलेरेसन के बदलना था, जो चार बड़े सवारियों का वजन उठा रही थी।

आगे कहा कि,

"चूंकि दो पहिया वाहन लॉरी के दाईं ओर से आगे बढ़ रहा था और लॉरी को ओवरटेक कर रहा था, जैसा कि दावेदारों ने आरोप लगाया है, दो पहिया ड्राइवर को बस को विपरीत दिशा से आते हुए देखना चाहिए था। बस को देखने के बाद भी उसने आगे बढ़ने का फैसला लिया। उसके इस निर्णय में, हम आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि उसने वाहनों की गति, स्थान और दो पहिया और बस के बीच के अंतर पार करने में लगने वाले समय को सही से समझ नहीं पाया, क्योंकि वह निर्धारित से अधिक भार उठा रहा था। अदालत का स्पष्ट मत है कि न केवल टू व्हीलर ड्राइवर, बल्कि सभी पिलर सवार भी सहायक लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं।"

अंत में, कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक सड़क उपयोगकर्ता को सावधानी के साथ सड़क का उपयोग करना चाहिए, यह सभी का कर्तव्य है। इसके साथ ही वाहन को इस तरह से चलाना चाहिए कि वह खुद को खतरे में न डालें और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों, दो पहिया वाहनों और अन्य वाहन को भी चलाने वाले को खतरे में न डालें।

केस का शीर्षक: तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन बनाम मारीमुथु और अन्य।

आदेश की कॉपी यहां पढ़ें:



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